जानें कैसे—–
कारण जब कार्य को क्षति पहुंचाने लगता है तो कार्य का दुर्बल हो जाना निश्चित है।
अद्भयोऽग्निर्ब्रह्मतः क्षत्रमश्मनो लोहमुत्थितम्।
तेषां सर्वत्रगं तेजः स्वासु योनिषुशाम्ययति।।
अर्थात् – अग्नि जल से,क्षत्रिय ब्राह्मण से,और लोहा पत्थर से प्रकट हुआ है। इनका तेज अन्य सब स्थानों पर तो अपना प्रभाव दिखाता है। परन्तु अपने को प्रकट करने वाले कारण से टक्कर लेने पर स्वयं ही शांत हो जाता है।
अयो हन्ति यदाश्मानमऽग्निना वारि हन्यते।
ब्रह्म च क्षत्रियो द्वेष्टि तदा सीदन्ति तेत्रयः।।
अर्थात् – जब लोहा पत्थर पर चोट करता है,आग जल को नष्ट करने लगती है,और क्षत्रिय ब्राह्मण से द्वेष करने लगता है ।तब ये तीनों ( लोहा,आग,क्षत्रिय ) दुःख उठाते हैं।अर्थात् ये दुर्बल हो जाते हैं।
आचार्य धीरज द्विवेदी “याज्ञिक”
(ज्योतिष वास्तु धर्मशास्त्र एवं वैदिक अनुष्ठानों के विशेषज्ञ)
संपर्क सूत्र – 09956629515
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