श्राद्ध तो आज समाप्त हो जाएँगे लेकिन ध्यान रहे श्रद्धा समाप्त न हो!
प्रयास करें कि वर्ष के शेष 349 दिन जीवित बुजुर्गों की सेवा के लिए समर्पित रहें।
केवल श्राद्ध में ही माता पिता को भोजन न कराए ।
श्रद्धा रखे परिवार में और प्रतिदिन जीवित माता-पिता को प्रतिदिन भोजन कराएं,तथा अपने श्रेष्ठ के प्रति आदर भाव रखें।
जो जीवित है उनको श्रद्धा,भाव,प्रेम,सम्मान प्रदान कर प्रतिदिन श्रद्धा से श्राद्ध करें।
।।समस्त पितरों को नमन।।
।। सबका मंगल हो ।।
आचार्य धीरज द्विवेदी "याज्ञिक"
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