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महादेव के दर पर चिता भस्म की होली, पिशाच, औघड़, गंधर्व बने हुरियारे भूत,

महादेव के दर पर चिता भस्म की होली, पिशाच, औघड़, गंधर्व बने हुरियारे भूत,

एक ओर मौत का सन्नाटा, दूसरी ओर होली की मस्ती, भूत, पिशाच, गंधर्व व यक्ष हुरियारे बने और चिता की भस्म बनी रंग-गुलाल । ऐसा दृश्य महादेव के दर पर ही दिख सकता है, जिन्हें दुत्कार दिया गया उनके साथ श्मशान में महादेव होली की मस्ती में झूम रहे हैं। खुशी में, दुख में, जीवन में, मरण में, रोशनी में, अंधेरे में महादेव एकसमान हैं। तभी तो महादेव हैं, जिस माहौल से दुनिया घबराती है, काशी उसमें जश्न मनाती है।

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