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क्या हम अपने लक्ष्य पर केंद्रित हैं या अपने लक्ष्य को इधर-उधर खोज रहे हैं?

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कुआँ

भारत के एक गाँव में रामलाल नाम का एक युवक रहता था। उस गाँव में पानी की बहुत कमी थी। रामलाल ने सोचा कि क्यों न गाँव में कुआँ खोद दिया जाए। वह उत्साह से कुआँ खोदने के लिए निकल पड़ा।

उसने गाँव में एक अच्छी जगह का चयन किया और खुशी से एक धुन गुनगुनाते हुए काम पर लग गया।

15 हाथ खोदने के बाद भी वहाँ पानी का कोई निशान नहीं था।

रामलाल ने कुछ देर आराम करने और फिर आगे खुदाई करने का निर्णय किया। तभी एक आदमी वहाँ से गुज़रा। उसने रामलाल से पूछा कि, “वह क्या कर रहा है?”

रामलाल ने जवाब दिया कि, “कुँआ खोद रहा हूँ, 15 हाथ खोदने के बाद भी पानी नहीं आया।”

अजनबी ने रामलाल से कहा कि, “वह एक ऐसी जगह के बारे में जानता है, जहाँ पर मिनटों में पानी आ जाएगा।”

अजनबी रामलाल को नई जगह पर ले गया और रामलाल तुरंत वहाँ खुदाई करने लगा।

पर वहाँ पर भी 15-20 फ़ीट खोदने के पर पानी का कोई नमो निशान नहीं था। जल्द ही एक और आदमी आया और रामलाल को एक ऐसे स्थान पर ले गया जहाँ उसने कहा कि पानी की धाराएँ बहेंगी।

और बताई जगह पर रामलाल खुदाई करने लगा। कई घंटों के बाद, तीस हाथ नीचे खोदने के बाद, पानी नहीं केवल उसका पसीना ही बहा।

वहाँ पानी की कमी थी, पर सलाहकारों की नहीं। किसी और की सलाह पर रामलाल ने एक और स्थान पर बीस हाथ खुदाई कर दी।

लेकिन फिर भी वहाँ पर भी पानी की एक बूंद भी नहीं थी। रामलाल निराश हो गया। खुद को हारा हुआ महसूस करने लगा।

तभी रामलाल का दोस्त प्यारेलाल वहाँ आया और उसने उसकी सारी कहानी सुनी। रामलाल ने अपने दोस्त से कहा कि, “वह कुल मिलाकर 85 हाथ खुदाई कर चुका है, पर अभी भी पानी नहीं मिला है।”

प्यारेलाल ने कहा, “दोस्त यदि तुम उन 85 हाथ खुदाई को एक ही जगह पर करते, तो तुम्हे गाँव में कहीं भी, यहाँ तक कि चट्टानी सतह के नीचे भी पानी मिल गया होता। तुमने इतने सारे गढ्डे तो खोद दिए, पर कुआँ एक भी नही!”

रामलाल अपने उद्देश्य में दृढ़ नहीं था।

उसने कई लोगों की सलाह पर ध्यान दिया। लेकिन, अगर वह दृढ़ निश्चयी और दृढ़ विश्वासी होता और एक ही जगह खुदाई करने में लगा रहता, तो वह निश्चित रूप से सफल होता।

पहले ही कदम पर लिए गए दृढ़ संकल्प को यदि अंत तक कायम रखा जाए तो वह पूर्ण सफलता प्राप्त करने में कभी विफल नहीं होगा।”

“ध्यान से मार्ग साफ हो जाता है जिससे हृदय के संवेग सतह पर अबाधित आ सकें। जब हम उन संवेगों के अनुसार कार्यवाही करते हैं तब जो निर्णय हम लेते हैं वे हमारे लिए सही होते हैं। शोर से ऊपर उठने और अपने अस्तित्व की गहराई से आने वाले हृदय के संवेगों को समझने में ध्यान हमारी सहायता करता है।”
दाजी

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