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लोक कलाकार हमारी परंपरा और संस्कृति के संवाहक=डॉ पाण्डेय

लोक कलाकार हमारी परंपरा और संस्कृति के संवाहक=डॉ पाण्डेय

लोक कलाकार हमारी परंपरा और संस्कृति के संवाहक=डॉ पाण्डेय
लोकमंगल संस्थान में जुटे जमुनापार के कलाकार
कजरी गीतों ने बांधी समां
करछना।शनिवार को लोक मंगल संस्थान रामपुर में जुटे जमुनापार के लोक कलाकारों ने आजादी के अमृत महोत्सव के क्रम में कजरी गीत प्रस्तुत करते हुए शहीदों को नमन कर उनके शौर्य का बखान किया।मोहन पांडेय द्वारा प्रस्तुत मातृ वंदना के उपरांत सत्यवान सत्यार्थी ने प्रस्तुत गीत पर खूब समां बांधी। उन्होने गाया-आजादी के अमृत महोत्सव मना ल,जवनवा उठा अब वतनवा बचा ल।लोक कलाकार रामबाबू यादव और साथियों ने तिरंगा तीन रंग का सारे जग में आला बा,झूमि रहा मतवाला बा ना।वरिष्ठ लोक कलाकार श्यामलाल बेगाना ने इ तिरंगा हमरे देशवा क शान और चाही भइया रहइं,चाही जाइ हो,सवनवा में न जाबइ ननदी जैसे गीतों पर खूब तालियां बटोरी तो वही सांस्कृतिक केंद्र के कलाकार त्रिभुवन नाथ गौड ने हमरे देशवा में देश के रतनवा ना जैसे कजरी गीत प्रस्तुत करते हुए शहीदों के शौर्य का बखान किया।सबरेज अहमद द्वारा प्रस्तुत कजरी गीत के उपरांत मोनू मस्ताना ने कजरी और पूर्वी गीतों पर खूब समां बांधी।लोक कलाकारों की प्रशंसा करते हुए संस्थान के निदेशक डॉ.भगवत पांडेय ने कहा कि कलाकारों ने मौसमी गीतों में देश की आनबान और शहीदों की शौर्य गाथा का जो बखान किया है निश्चित रूप से आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान पूरे समाज को अपने अमर शहीदों के प्रति समर्पण की भावना से प्रेरणा और देश भक्ति का संदेश देता है।संस्थान द्वारा अनवरत कलाकारों का अभिनंदन करते हुए यह अलख आगे भी जगाई जाती रहेगी।प्राचार्य लोक कवि राम लोचन सांवरियां ने कहा कि संस्थान के माध्यम से अपने नये पुराने लोक कलाकारों को एकजुट कर अपने संस्कार और परंपराओं से जुड़े गीतों की सर्जना का यह सिलसिला आगे भी चलता रहेगा।अध्यक्षता योगेन्द्र मिश्र और संचालन गीतकार राजेंद्र शुक्ल ने किया।इस मौके पर मोहिनी श्रीवास्तव, कृष्णाकांत निषाद,श्यामजी यादव,रामबाबू पाल,वेद श्रीवास्तव,समोधी प्रसाद निषाद,रणजीत सिंह,दयाशंकर,रमाशंकर गौड़,राम भवन,सूर्यभान यादव,दिनेश कुमार,वीरेंद्र कुमार,दिलीप सिंह,विजय पाल,अतुल तिवारी,रजत मिश्रा समेत संगीत प्रेमी,समाजसेवी,प्रवुद्धजन मौजूद रहे।

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