क्या हम अपनी सुंदरता का रहस्य बाहरी वस्तुओं में खोज रहे हैं?
मारिया की नई टोपी
मारिया एक युवा महिला थी, जो न्यूयॉर्क शहर के एक छोटे से अपार्टमेंट में अपनी माँ के साथ रहती थी। वह हर मायने में एक औसत युवा महिला थी – न तो विशेष रूप से सुंदर थी, न ही ख़राब; उनका कद न तो छोटा था, न बहुत लंबा; न तो वह बहुत ज़्यादा प्रतिभाषाली थी, न ही औसत से कम।
वह एक बड़ी कंपनी में सचिव के रूप में काम करती थी और उसका जीवन काफी बोरियत भरा और नीरस था। दफ्तर में कोई भी उस पर विशेष ध्यान नहीं देता था। और जो कोई उससे कभी बात कर भी लेता था, तो वह व्यक्ति मारिया को भी उसके जीवन की तरह नीरस और उबाऊ समझने लगता था।
एक सुबह, जब मारिया दफ्तर जा रही थी तो उसने देखा कि रास्ते के किनारे पर एक प्यारी-सी टोपी की दुकान खुल गई है। उत्सुकतावश मारिया दुकान के अंदर चली गई।
दुकान में दो-चार लोग पहले से मौजूद थे। एक छोटी बच्ची भी अपनी माँ के साथ टोपी लेने आई थी और कुछ और ग्राहक भी टोपी पहन-पहन कर देख रहे थे।
मारिया भी टोपियाँ पहन कर देखने लगी और कुछ ही समय में, उसे वैसी टोपी मिल गई जैसी कि वह ढूँढ रही थी। वह टोपी उसके सिर पर बहुत ही अच्छे से फिट हो रही थी और बहुत ही आरामदायक और हल्की भी थी।
और वास्तव में वह टोपी मारिया के उपर बहुत ही अच्छी लग रही थी। सबसे पहले मारिया पर ध्यान गया उस छोटी-सी बच्ची का, जो अपनी माँ के साथ टोपी खरीदने आई थी। उस बच्ची ने जैसे ही मारिया को टोपी में देखा, वह अपनी माँ से बोली, “मम्मी, देखो वह आंटी टोपी के साथ कितनी सुंदर लग रहीं हैं!”
उस बच्ची की माँ ने मारिया से कहा, “मैम, यह टोपी आप पर बहुत अच्छी लग रही है!”
दुकान में खड़े एक और खरीददार ने भी मारिया के पास आकर बोला, “मैडम, आप इस टोपी में बहुत प्यारी लग रही हैं!”
यह सुनकर मारिया शरमा गई और मुस्कुराने लगी। यह सब सुनकर मारिया का दिल उत्साह से भर गया और वह खुद को फ़िर से देखने के लिए आईने के पास चली गई। अब जब मारिया ने खुदको आईने में देखा तो अपने वयस्क जीवन में पहली बार उसे खुदको आईने में देख कर बहुत ही अच्छा लगा।
उसके चेहरे पर एक बड़ी-सी मुस्कराहट और चमक आ गई। उसने काउंटर पर जा कर टोपी का भुगतान किया और दुकान के मालिक को धन्यवाद दिया और जैसे ही मारिया दुकान से बाहर निकली तो उसे लगा जैसे वह किसी और दुनिया में आ गई हो।
आज से पहले उसने कभी भी फूलों के रंग या ताजी हवा की सुगंध पर ध्यान नहीं दिया था, लेकिन आज मारिया को चारों तरफ सुगंधित और ताजगी भरा वातावरण महसूस हो रहा था। कारों और लोगों की आवाज आज मारिया को एक सुरीली धुन की तरह लग रही थी।
वह ऐसे चल रही थी जैसे मानो बादल के साथ मन ही मन गुनगुनाते हुए बह रही हो।
आज जब मारिया उस कॉफी की दुकान के सामने से गुजरी जहाँ से वह हर रोज दफ्तर जाने के लिए गुज़रती थी तो आज पहली बार एक युवक ने उसे पुकारा, “आप बहुत अच्छी लग रही हैं! क्या आप यहाँ नई आयी हैं? क्या मैं आपके साथ एक कप कॉफी पी सकता हूँ?”
मारिया मुस्कुराई और बोली, “धन्यवाद,” और फिर से गुनगुनाते हुए अपने दफ्तर की तरफ बढ़ गई।
मारिया जैसे ही दफ्तर के दरवाजे तक पहुँची, तो चौकीदार ने दरवाज़ा खोला और उसे सुप्रभात की शुभकामनाएँ दी। उस द्वारपाल ने इससे पहले कभी भी मारिया पर ध्यान भी नहीं दिया था। लिफ्ट में खड़े लोग भी मारिया को देखकर मुस्कुराए और मारिया से पूछा कि, “उसके लिए किस मंजिल का बटन दबाया जाए।”
दफ्तर के लोग भी मारिया को देखकर आज पहली बार बोले कि, “आज वह कितनी प्यारी लग रही है।” प्रबंधक ने भी आज पहली बार मारिया से पूछा कि, “उसे यहाँ काम करके कैसा महसूस हो रहा है।” इसी बारे में विस्तार से बात करने के लिए उन्होंने उसे दोपहर के भोजन के लिए भी आमंत्रित किया।
जब इतने आनन्द और उत्साह से भरा दिन समाप्त हुआ तो मारिया ने बस के बजाय टैक्सी से घर जाने का फैसला किया। जैसे ही उसने टैक्सी रोकने के लिए हाथ ऊपर किया तो अचानक से 2 टैक्सी उसके सामने आकर के रुक गयीं। उसने पहली वाली टैक्सी से जाने का फैसला किया और पीछे की सीट पर बैठ गई। वह पूरे समय अपने आज के जादू भरे दिन के बारे में सोचने लगी और कैसे आज के दिन ने उसका जीवन ही बदल दिया था… वह मन ही मन अपनी नई टोपी को धन्यवाद देने लगी।
जब वह घर पहुँची तो उसकी माँ ने दरवाजा खोला। मारिया को देखकर के उसकी माँ ने गहरी साँस लेते हुए कहा, “मारिया, कितनी सुंदर लग रही हो! तुम्हारी आँखें बिल्कुल वैसे जगमगा उठी हैं जैसे कि बचपन में जगमगाती थीं!”
“हाँ माँ,” मारिया ने खुशी से कहा। “इस सब के लिए मैं अपनी इस नई टोपी को धन्यवाद देती हूँ, मेरा आज का दिन बहुत ही शानदार था!”
माँ के चेहरे पर अचानक आश्चर्य का भाव आ गया। “कौनसी टोपी, मारिया?” मारिया की माँ ने कहा। अब उनकी आवाज में चिंता का भाव झलक रहा था।
मारिया घबरा गई। उसने अपने सिर को छुआ और महसूस किया कि उसकी जिंदगी बदलने वाली टोपी वहाँ नहीं थी…उसे याद नहीं आ रहा था कि उसने टोपी टेक्सी में उतारी थी… या दोपहर के भोजन पर …या कार्यालय में…
अब वह उस दुकान के बारे में सोचने लगी जहाँ से उसने टोपी खरीदी थी। उसने जब पहली बार उस टोपी को देखा…उसे पहना… फिर वह कैशियर के पास भुगतान के लिए गई…
और फिर उसे याद आया कि भुगतान करते समय उसने टोपी को काउंटर पर रख दिया था और वह टोपी को वहीं काउंटर पर भूल गई थी।
यह सब सोचते-सोचते वह बाहर गली में चली गई…बिना टोपी के…लेकिन अभी भी उसके चेहरे और आँखों में चमक थी।
उस पल मारिया की आँखों की और चेहरे की चमक और जादू भरे दिन की वजह वह टोपी नहीं थी बल्कि उसके भीतर के सकारत्मक विचारों का जादू था!
हमारे विचार हमें जटिल बंधन में बाँध कर के अपना गुलाम बना सकते हैं या हमें मुक्त कर के मीठी स्वतंत्रता भी दे सकते हैं। जो कुछ भी हम चाहते हैं वह होना, करना या पाना हमारे विचारों पर निर्भर करता है!
️ “हम अपने रोजमर्रा के विचारों से अपनी नियति का निर्माण करते हैं-हमारी इच्छाएँ, जो हमें आकर्षित करती हैं और हमारी पसंद और नापसंद जो हमारे अंदर प्रतिरोध उत्पन्न करती हैं।”
दाजी












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