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नदियों से पानी उठाकर ही बुझाई जा सकती है प्यास:डॉ.पाण्डेय

नदियों से पानी उठाकर ही बुझाई जा सकती है प्यास:डॉ.पाण्डेय

नदियों से पानी उठाकर ही बुझाई जा सकती है प्यास:डॉ.पाण्डेय
करछना। जमुनापार के सुदूर क्षेत्रों के कई गांवों में पेयजल की गंभीर समस्या अनवरत बनी हुई है।बुंदेलखंड जैसा क्षेत्र डार्क जोन भी घोषित हो चुका है,जहां लापर, डाबर और पाठा के पथरीले क्षेत्र में बोरिंग एक जटिल समस्या है। ऐसी स्थिति में यमुना और टोंस नदियों से ही पानी उठाकर लोगों की प्यास बुझाई जा सकती है। रामपुर में हुई जागृति मिशन की बैठक के दौरान यह बातें मिशन के संयोजक डॉ,भगवत पाण्डेय ने कही। डॉ.पाण्डेय ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और हेमवती नंदन बहुगुणा के प्रबल प्रयासों से कभी धनावल, कोहडा़र घाट,देवघाट,नारीबारी
जैसी जल योजनाओं द्वारा सिंचाई और पेयजल की व्यवस्था की गई थी जो योजनाएं कालांतर में लगभग ध्वस्त हो चुकी हैं। 12 क्षेत्र में यमुना नदी से पानी उठाकर कमला पम्प कैनाल और भोंड़ी पम्प कैनाल द्वारा सैकड़ों गांवों के सिंचाई के लिए व्यवस्था की गई थी। उधर यमुनापार में बनाए गए नेशनल थर्मल पावर कारपोरेशनों के लिए भी यमुना और गंगा जी से जल आपूर्ति की जा रही है। ऐसी स्थिति में जब पथरीले इलाके में बोरिंग असफल हो और कई पेयजल टंकियां भी सूखी पड़ी हों तो नदियों से पानी लिफ्ट कराकर ही सुदूर सैकड़ों गांव के लोगों की पेयजल की गंभीर समस्या से निजात पाई जा सकती है। मिशन के लोगों ने कहा कि मेजा,कोरांव,शंकरगढ़ के की गांव में पेयजल की समस्या लगातार बनी हुई है जहां इस वर्ष भी गर्मी के मौसम में 70 टैंकरों द्वारा पानी की आपूर्ति की जाती रही।ऐसी गंभीर समस्या से निदान के लिए एक मात्र यही विकल्प है कि पूर्व की पेयजल योजनाओं को दुरुस्त कराकर और नदियों से पानी लिफ्ट करा कर पेयजल को लोगों को सुलभ कराया जाए। इस मौके पर तीरथ राज पांडे,जितेंद्र मिश्र,अतुल तिवारी,रजत पाण्डेय, विजय पाल,अशोक विश्वकर्मा,मानिकचंद ओझा राजमणि चौधरी, अशोक सिंह समेत कई लोग मौजूद रहे।

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