जीवनोपयोगी बातें —-
कोई हमारी गलतियां निकालता है तो हमें प्रसन्न होना चाहिए क्योंकि कोई तो है जो हमें पूर्ण पवित्र बनाने के लिए अपना दिमाग और समय दे रहा है।
सतुष्ट जीवन सफल जीवन से सदैव श्रेष्ठ होता है क्योंकि सफलता सदैव दूसरों के द्वारा आंकलित होती है जबकि संतुष्टि स्वयं के मन और मस्तिष्क द्वारा।
बहुत तेज दिमाग चाहिए अपनी गलतियां निकालने के लिए परन्तु एक सुंदर मन होना चाहिए अपनी गलतियां स्वीकार करने के लिए।
जीवन में ऊंचा उठने के लिए किसी डिग्री की जरूरत नहीं होती कुछ अच्छे शब्द ही आप को महाराजा बना देते हैं।
जो मनुष्य अपनी निन्दा सुन लेने के बाद भी शान्त रहता है वह सारे संसार पर विजय प्राप्त कर लेता है।
।। सबका मंगल हो ।।
आचार्य धीरज द्विवेदी “याज्ञिक”











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