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जीवन में हमारा लक्ष्य कौन निर्धारित करता है?

जीवन में हमारा लक्ष्य कौन निर्धारित करता है?

जीवन में हमारा लक्ष्य कौन निर्धारित करता है?

भूला हुआ राज्य

एक बार एक बहुत बड़े सम्राट का बेटा जहाज में यात्रा कर रहा था। वह उस राज्य का उत्तराधिकारी भी था। उस राजकुमार का जहाज एक चक्रवात में फँस कर एक चट्टान से टकरा जाता है।

चट्टान से टकराने के कारण वह जहाज पूरी तरह से नष्ट हो जाता है लेकिन वह राजकुमार लकड़ी के एक टुकड़े पर टिका रहता है।

पानी के तेज बहाव के कारण वह एक अज्ञात भूमि के तट पर पहुँच जाता है, जहाँ कोई उसे नहीं जानता।

वह जगह उस राजकुमार के लिए एकदम अनजानी थी। उसके पास खाना खाने के लिए भी पैसे नहीं थे। थकान, हताशा और भूख ने उसे बीमार कर दिया था।

कुछ मछुआरों को उस पर दया आ गई और वे उसे अपनी बस्ती में ले गए और चिकित्सक से उसका इलाज कराया। कुछ ही दिनों में उस राजकुमार का स्वास्थ्य अच्छा होने लगा और धीरे-धीरे वह राजकुमार उन मछुआरों की बस्ती का हिस्सा बन गया। उसे अपने पिछले जीवन की कुछ धुंधली यादों के अलावा कुछ भी याद नहीं था।

महल के अपने पिछले जीवन को वह पूरी तरह से भूल चुका था। वह अपने आप को मछुआरों के परिवार का ही हिस्सा मानने लगा और अन्य मछुआरों की तरह वह भी कठिनाइयों का सामना करते हुए बड़ा होने लगा।

दूसरी तरफ राजा और राजा के सिपाहियों द्वारा राजकुमार की तलाश की जा रही थी। खोजकर्ता अलग अलग देशों में जाकर के राजकुमार की तलाश में जुटे हुए थे। लेकिन यह एक बहुत ही मुश्किल काम था। लाखों लोगों के बीच राजकुमार को पहचानना बहुत ही मुश्किल था।

खोजकर्ताओं में से एक खोजकर्ता, जिसकी सम्राट के साथ घनिष्ठ मित्रता थी, वह राजकुमार के शरीर पर जन्म-चिह्न को जानता था। इसलिए उसके लिए राजकुमार की पहचान कर पाना थोड़ा आसान था।

वह खोजी, खोज करते-करते उस जगह पहुँचा जहाँ पर वह राजकुमार रहता था। उसने राजकुमार को देखते ही पहचान लिया और राजा को राजकुमार के बारे में सूचित किया। लेकिन राजकुमार का अपने मछुआरे परिवार से लगाव बहुत ही बढ़ गया था।

वह राजकुमार अपनी पालने वाली माँ और पिता को छोड़ने के विचार के बारे में सोचने मात्र की भी कल्पना नहीं कर सकता था। उसने मछुआरों को छोड़ने से इन्कार कर दिया।

लेकिन जब खोजकर्ता उसे बहुत प्यार और धैर्य से समझाता है, तो वह राजकुमार धीरे-धीरे उस खोजकर्ता की बातों से आश्वस्त होने लगा।

लेकिन अब खोजकर्ता द्वारा दिये गये ज्ञान ने, उस राजकुमार के मन में एक संघर्ष की स्थिति पैदा कर दी। वह सोचने लगता है कि अगर उसे अपनी खोई हुई विरासत वापस लेनी है, तो उसे अपने इस परिवार से लगाव खत्म करना होगा और अपने असली परिवार में वापिस लौटना होगा।

यह कहानी कहीं हमारा अपना जीवन ही तो नहीं। राजकुमार कोई और नहीं बल्कि आत्मा है, राजा कोई और नहीं बल्कि परमात्मा है, महल का अर्थ है आत्मा का असली घर, अज्ञात भूमि शरीर है और राजकुमार को पालने वाले पिता और माता पृथ्वी पर जैविक पिता और माता के अलावा और कोई नहीं है, मछुआरों का अर्थ है रिश्तेदार। और वह खोजकर्ता जिसने राजकुमार को अपने असली घर का पता दिया, वह है गुरु जो हमारा मार्गदर्शन करके हमें सही रास्ता दिखाते हैं। गुरु की सहायता से हम अपने वास्तविक घर के बारे में जान पाते हैं और उसको पाने में लग जाते हैं।

एक बार जब हम अपने गुरु की बातों से आश्वस्त हो जाते हैं और हमारे अंदर अपने असली घर को जानने की इच्छा जागृत हो जाती है, तब गुरु ही हमारा हाथ पकड़कर हमें हमारे लक्ष्य तक ले चल सकते हैं।एक बार जब हम अपने गुरु की बातों से आश्वस्त हो जाते हैं और हमारे अंदर अपने असली घर को जानने की इच्छा जागृत हो जाती है, तब गुरु ही हमारा हाथ पकड़कर हमें हमारे लक्ष्य तक ले चल सकते हैं।
“लक्ष्य किसी प्रक्रिया या ईश्वर द्वारा निर्धारित नहीं होता हैं। लक्ष्य स्वयं व्यक्ति द्वारा निर्धारित किया जाता है। यह हम पर निर्भर करता है कि हम क्या लक्ष्य निर्धारित करते हैं और हम जो कुछ भी करते हैं उससे हम क्या हासिल करना चाहते हैं। यह केवल आध्यात्मिकता के लिए नहीं है बल्कि हमें भौतिक संसार में भी लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए।”
दाजी

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