कुंवर रेवती रमण सिंह त्याग की प्रतिमूर्ति
गंगा पुत्र, शाने प्रयाग, इलाहाबाद के गांधी आदरणीय कुं रेवती रमन सिंह जी राजघराने में जन्म लेने के बावजूद माटी से जुड़े बरांव रियासत के बादशाह आदरणीय कुं रेवती रमन सिंह जी का 50 वर्षों का शानदार इतिहास रहा है, ज्यादातर राजनीतिक सफर विपक्ष में रहा,विपक्ष रहते हुए न्याय के लिए सड़क से संसद तक का संघर्ष भरा इतिहास रहा है, प्रदेश या देश में सरकार चाहे जिसकी रही हो क्या मजाल है कि इलाहाबाद में किसी कार्यकर्ता के खिलाफ कोई अन्याय कर सके, याद दिला दुं प्रदेश जब हंटर वाली सरकार थी नगर कार्यालय ताला लगवा दिया था, उस वक़्त कुँवर साहब कचहरी से चौक कार्यालय तक पैदल चलकर जिला प्रशासन को ताला खोलने पर मजबूर कर दिया था, कुं साहब अजान बाहु हैं,कुं साहब अजातशत्रु है, जिनकी प्रशंसा विपक्ष के कद्दावर भी करतें हैं, चाहे लोकसभा में तत्कालीन नेता विपक्ष स्वर्गीय सुषमा स्वराज जी का बयान हो, चाहे राज्यसभा में देश के उपराष्ट्रपति श्री वेंकैया नायडू जी का बयान हो, चाहे उत्तर प्रदेश की विधानसभा में मुख्यमंत्री जी का बयान हो, चाहे हाल ही में राज्यसभा में देश के प्रधानमंत्री द्वारा बीच रास्ते में कुं साहब को रोककर हाल चाल लेने की बात हो, कुं साहब त्याग की प्रतिमूर्ति है, जिसका जीता जागता उदाहरण सन 1989 व दिसंबर 2021 हो, दोनो बार कुं साहब ने प्रदेश की सबसे बड़ी कुर्सी को ठुकरा दिया था, कुं साहब ने अपने संसदीय जीवन में कैंसर, किडनी, हार्ट, मां गंगा की अविरल धारा जैसे तमाम जन हित के मुद्दों को उठाने का कार्य किया, जिसकी तमाम दलों के धुरंधरों व देश की जनता ने भूरि भूरि प्रशंसा की, घर का व्यक्ति अंधा बना रहा, बाहरियों की आंखें बाग बाग होतीं रहीं, कुं साहब के हर निर्णय जनमानस को शिरोधार्य होगा,
“कुँवर नहीं ये आंधी हैं उत्तर प्रदेश के गांधी हैं”
“गैरों में कहां दम था हमें तो अपनो ने लूटा”
“मेरी कश्ती वहां डूबी जहां पानी ही नहीं था”













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