Jan Media TV

Inform Engage Inspire

Advertisement

आजादी के अमृत महोत्स पर आजादी मेरी नजर में

आजादी के अमृत महोत्स पर आजादी मेरी नजर में

आजादी के अमृत महोत्स पर आजादी मेरी नजर में

आजादी का अभिप्राय है किसी के बंधन से मानसिक,आर्थिक, शारीरिक,सामाजिक रूप से मुक्त होना।
प्राचीन समय में हम भारत वासियों में,राजाओं में आपसी सहमति,एकता न होने से हम विदेशी आक्रांताओं द्वारा गुलाम रहे।गुलामी से आजादी दिलाने हेतु बहुत से महापुरुषों ने वीरांगनाओं ने अपने प्राणों की आहुति दी तब जाकर हम आजाद हुए।
परन्तु मेरी नजर में तो हम कहने मात्र को आजाद हुए लेकिन आज भी हम गुलाम ही हैं क्योंकि हम सामाजिक,आर्थिक,शारीरिक रूप से तो आजाद हुए परन्तु मानसिक रूप से आज भी हम गुलामी में जकड़े हुए हैं।
मेरे हिसाब से तो सामाजिकता में भी हम गुलाम ही हैं क्योंकि यहां का संविधान,यहां का कानून यह तो अधिकांशतः विदेशी नीति पर ही आधारित है।
सबसे बड़ी बात है कि हम मानसिक रूप से विदेशी भाषा,विदेशी संस्कृति,विदेशी सभ्यता के गुलामी में जकड़े हुए हैं।
जबतक हम इन विदेशी नीति,भाषा,संस्कृति,सभ्यता से बाहर नहीं निकलेंगे तब तक हम नाम मात्र के आजाद हैं।मेरी नजर में ऐसी आजादी का कोई औचित्य नहीं है।
अतः हम भारत वासियों को वर्तमान में व्याप्त इन विदेशी नीति,भाषा,संस्कृति,सभ्यता से आजाद होने के लिए सदैव प्रयासरत रहना चाहिए।
और अपनी सनातनी सभ्यता,संस्कृति,नीति,और अपनी मातृ भाषा को स्वीकार करके आजादी का अमृत महोत्सव मनाएं।

आचार्य धीरज द्विवेदी “याज्ञिक”
ग्राम व पोस्ट खखैचा प्रतापपुर हंडिया प्रयागराज उत्तर प्रदेश।
संपर्क सूत्र-09956629515
08318757871

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *