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माघ पूर्णिमा व संत रविदास जयंती की पूर्व संध्या पर जगह-जगह गाय को भोजन- सरदार पतविंदर सिंह

माघ पूर्णिमा व संत रविदास जयंती की पूर्व संध्या पर जगह-जगह गाय को भोजन- सरदार पतविंदर सिंह

रैदास जन्म के कारणै, होत न कोई नीच। नर को नीच करि डारि हैं, औछे करम की कीच।।

नैनी प्रयागराज /भारतीय जनता पार्टी अल्पसंख्यक मोर्चा काशी क्षेत्र क्षेत्रीय उपाध्यक्ष सरदार पतविंदर सिंह ने माघ पूर्णिमा व संत रविदास जयंती की पूर्व संध्या पर जगह-जगह गाय को भोजन कराते हुए कहा कि संत रविदास धार्मिक प्रवृति के दयालु एवं परोपकारी व्यक्ति थे.उनका जीवन दूसरों की भलाई करने में और समाज का मार्गदर्शन करने में व्यतीत हुआ.वे भक्तिकालीन संत एवं महान समाज सुधारक थे. उनके उपदेशों एवं शिक्षाओं से आज भी समाज को मार्गदर्शन मिलता है. संत रविदास को रैदास,गुरु रविदास, रोहिदास जैसे नामों से भी जाना जाता है.संत रविदास जी ने दुराचार, अधिक धन का संचय, अनैतिकता और मांसाहार को गलत माना है. उन्होंने अंधविश्वास,भेदभाव, मानसिक संकीर्णता को समाज विरोधी माना है. उपाध्यक्ष काशी क्षेत्र अल्पसंख्यक मोर्चा सरदार पतविंदर सिंह ने आगे कहा कि संत रविदास जी भी कर्म को प्रधानता देते थे.उनका कहना था कि व्यक्ति को कर्म में विश्वास करना चाहिए. आप कर्म करेंगे, तभी आपको फल की प्राप्ति होगी.फल की चिंता से कर्म न करें.व्यक्ति पद या जन्म से बड़ा या छोटा नहीं होता है, वह गुणों या कर्मों से बड़ा या छोटा होता है.रैदास जन्म के कारणै, होत न कोई नीच। नर को नीच करि डारि हैं, औछे करम की कीच।। उपाध्यक्ष काशी क्षेत्र अल्पसंख्यक मोर्चा सरदार पतविंदर सिंह ने अंत में कहा कि वे समाज में वर्ण व्यवस्था के विरोधी थे. उन्होंने कहा है कि सभी प्रभु की संतान हैं, किसी की कोई जात नहीं है.‘जन्म जात मत पूछिए, का जात और पात। रैदास पूत सम प्रभु के कोई नहिं जात-कुजात।।

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