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।। ऊं श्री परमात्मने नमः ।।

।। ऊं श्री परमात्मने नमः ।।
।। यदि हारने की कोई संभावना ना हो, तो जीतने का कोई मतलब नहीं है। व्यक्ति क्या है? ये महत्वपूर्ण नहीं है, लेकिन व्यक्ति में क्या है ? ये बहुत ही महत्वपूर्ण है ।।
।। संतुष्टि सबसे बड़ा धन है, विश्वास सबसे बड़ा बंधु है, तथा निर्वाण सबसे बड़ा सुख है। जो व्यक्ति अपने जीवन में दूसरों को खुशी के पल देता है वह खुद भी बहुत सुख पाता है ।।
।। सुप्रभातम् ।।
।। सबका मंगल हो ।।
आचार्य धीरज द्विवेदी “याज्ञिक”

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