प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र को बनाया प्रयोगशाला, पहले आजमाते हैं फिर देश में करते लांचिंग
इतिहास के पन्नों से भी पुरानी काशी पुरातनता को सहेजे आधुनिकता के रंग में रंग रही है। नित नए विकास के सोपान को गढ़ रही है। पुरानी ख्याति को स्पर्श कर रही है। सरकार विकास को रफ्तार देने संग धर्म, संस्कृति, अध्यात्म व बनारसीपन जिंदा रखने की जुगत में लगी है।श्री काशी विश्वनाथ धाम इसका सबसे बड़ा साक्ष्य है। धाम को विस्तार दिया गया पर इसकी पुरातनता से कहीं छेड़छाड़ नहीं हुई। धाम में मौजूद सभी मंदिरों को उचित स्थान दिया गया। इतना ही नहीं, मंदिर जिस दिशा में थे, उसी दिशा में स्थापित किए गए। तंग गलियों को संवारा गया, प्राचीरों को सहेजा गया पर मूल स्वरूप नहीं बदले गए। स्मार्ट सिटी के तहत दर्जनों वार्डों का कायाकल्प हो रहा है, इसमें भी इसी बात को ध्यान में रखकर कार्य हो रहे हैं।जापान के सहयोग से 186 करोड़ की लागत से बने सभागार हाल को रुद्राक्ष नाम दिया गया। रूद्राक्ष की उसमें नक्काशी भी कराई गई। प्रस्तावित लगभग 170 करोड़ से अधिक की लागत से निर्मित होने वाले 19 मंजिला मंडलीय कार्यालय के दो भवनों को डमरू का आकार देकर जोडऩे का प्लान है, ताकि काशी की पहचान बनी रहे।काशी विश्वनाथ धाम में बुजुर्गों की देखभाल के लिए बने भवन का नाम मुमुक्षु भवन रखा गया है। इसका मूल उद्देश्य काशी के विकास के साथ ही साथ उसके प्राचीनता व महत्ता को बरकरार रखना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को अखिल भारतीय महापौर सम्मेलन में काशी में गंगा के महत्व व घाटों को रेखांकित किया। इकोनामी में गंगा की भूमिका बताई। यह सब परिर्वतन काशी में दिख रहा है। गंगा में जलयान दौड़ रहे हैं लेकिन नावें बंद नहीं नहीं हुई, बल्कि अपडेट हुई। डीजल से चलने वाली पुरानी बोट अब सीएनजी से चल रही हैं। जल प्रदूषण पर जहां अंकुश लगा वहीं नाविकों के खर्च कम हुए और आमदनी बढ़ी। गंगा के सामांतर नहर निर्माण प्रस्तावित किया गया ताकि घाटों का संरक्षण हो सके।प्रधानमंत्री ने सम्मेलन में यह भी कहा कि बनारस प्राचीन नगरी और नए भारत की रूपरेखा है। हर गली, हर पत्थर, हर पल से इतिहास की हर तवारीख से कुछ न कुछ सीख सकते हैं। जीवन की प्रेरणा बना सकते हैं। विरासत को सहेज सकते हैं। लोकल को शहर की पहचान बना सकते हैं, यह सच है। बनारस में पान की खेती नहीं होती है लेकिन बनारस ने पान को सहेजा। अब इसकी पहचान है। देश के बहुतायत जिलों में साड़ी बनती है लेकिन काशी ने इसे ब्रांड दिया आज बनारसी साड़ी हर महिला की चाहत होती है। हर शादी में लोग बनारसी साड़ी क्रय करते हैं। प्रधानमंत्री अपने संसदीय क्षेत्र को पूरी तरह प्रयोगशाला के रूप में अपनाते हैं। उदाहरण, नीति आयोग को काशी में एक ब्लाक को माडल ब्लाक बनाने का कार्य है। नतीजा, नीति आयोग ने सेवापुरी ब्लाक को माडल बनाने का संकल्प लिया। लगभग पांच माह के अंदर इस ब्लाक में सैकड़ों काम हुए। आंगनबाड़ी से लगायत बेसिक के स्कूल तक में स्मार्ट क्लासेज की व्यवस्था हुई। नीति आयोग के सीईओ लगायत पूरी टीम ब्लाक में कई मर्तबा आई। ब्लाक के गांवों का भ्रमण की। ब्लाक आज माडल के रूप में देश के सामने खड़ा है। अब यही माडल पूरे देश में लागू किए जाने की बात है।स्वच्छता मिशन की शुरूआत भले ही राष्ट्रीय स्तर पर हुई लेकिन नब्बे फीसद प्रयोग बनारस के गांवों में हुई। स्वच्छता निगरानी टीम के गठन से लगायत गांवों में खुले में शौच करने वालों को देखकर सिटी बजाने समेत कई कार्य को यहां प्रयोग के तौर पर अपनाया गया और परिणाम बहुत सार्थक रहे। नतीजा पूरे देश में इसे प्रभावी किया गया। बनारस के ही ब्लाकों व गांवों में स्वच्छता को लेकर प्रतिष्पर्धा की शुरूआत की गई। प्रधानमंत्री ने इसे निकायों में भी प्रभावी करने की आज बात कही। पीएम ने स्वनिधि की शुरूआत के दौरान कोरोना काल में मोमोज विक्रेता अरविंद समेत कई लोगों से बात की। उनकी परेशानी से अवगत हुए। प्रधानमंत्री ने आज पूरे देश के निकायों को आह्वान किया कि रेहड़ी, खोमचे व अन्य फुटपाथ पर दुकान लगाने वालों की इस योजना से मदद की जाए।











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