मां और गुरु
मां का प्रेम सर्वविदित है। गुरु के प्रेम को इससे कम जाना जाता है और ईश्वर के प्रेम को तो इससे भी कम। असल में यह मां के प्रेम से किसी भी तरह कम नहीं है - भले ही बच्चा दुर्व्यवहार करे या उसे दु:ख पहुंचाये, फिर भी वह अपने बच्चे की सुरक्षा का बेहद ख्याल रखती है। अपने बच्चे की प्रसन्नता और खुशहाली के लिए मां सदा अनेक साधनों पर विचार करती रहती है। गुरु के साथ भी ऐसा ही है, जो वास्तव में उसकी आध्यात्मिक मां है। शास्त्रों में यह भी वर्णित है कि गुरु का दर्जा मां से अधिक ऊंचा होता है। इसका कारण यह बताया गया है कि गुरु आध्यात्मिक मां है, जबकि ईश्वर आध्यात्मिक पिता। गुरु सदा यही चाहता है कि उसका आध्यात्मिक बालक दिन दूनी रात चौगुनी उन्नति करें, जिसके परिणामस्वरूप ईश्वर बच्चे की परवरिश पर ध्यान देने का प्रेरित होता है क्योंकि आध्यात्मिक मां बच्चे का इतना ख्याल रखती है।
बाबूजी महराज












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