Jan Media TV

Inform Engage Inspire

Advertisement

UP Elections 2022: भाजपा के 57% सिटिंग विधायकों के टिकट ही मिलने के आसार 

UP Elections 2022: भाजपा के 57% सिटिंग विधायकों के टिकट ही मिलने के आसार 

यूपी विधानसभा चुनाव 2022 के बाबत अब चुनाव प्रचार शुरू हो चुका है। प्रधानमंत्री, रक्षामंत्री, गृहमंत्री घूम फिरकर यूपी का दौरा कर रहे हैं। भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व मंत्रियों की जिम्मेदारी तय कर रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को काशी और अवध क्षेत्र में पार्टी को मजबूत बनाने की जिम्मेदारी मिल सकती है तो भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा खुद के लिए कानपुर क्षेत्र में बड़ी जिम्मेदारी निभाएंगे। अमित शाह के पास पूरे यूपी और खासकर पश्चिमांचल के लिए विशेष योजना है। यूपी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भरपूर समय देने वाले हैं। चुनाव प्रचार की यह रणनीति भी अंतिम रूप ले रही है।गृहमंत्री अमित शाह बनारस में 12 नवंबर को बड़ी भूमिका बनाकर आए हैं। पार्टी के टिकट बंटवारे को लेकर उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच में एक रेखा खींच दी है। प्रदेश संगठन मंत्री सुनील बंसल का कार्यालय इसे फोन करके अंतिम रूप देने में लगा है। अमित शाह ने प्रदेश भर के 400 से अधिक विधानसभा सीटों के प्रभारियों से पूछा कि वह चुनाव लड़ना चाहते हैं तो हाथ उठाएं। सूत्र बताते हैं कि 100 से अधिक हाथ उठ गए। इसके बाद अमित शाह ने कहा कि जो चुनाव लड़ना चाहते हैं, उन्हें विधानसभा सीट के प्रभारी पद से हटना होगा। आगे उन्हें चुनाव लड़ाने के लिए टिकट देने की कोशिश होगी, लेकिन इसकी कोई गारंटी नहीं है कि उन्हें टिकट मिल पाएगा।जो विधानसभा सीटों के प्रभारी हैं, वह अपना काम करते रहेंगे। तो बताइए कौन-कौन इसके लिए तैयार है। अमित शाह के इतना कहने के बाद कोई हाथ नहीं उठे। इसके साथ यह बैठक नई रणनीतिक चर्चा के साथ आगे बढ़ गई। अब जमीनी कार्यकर्ताओं, नेताओं की मंशा टटोलने के लिए प्रदेश संगठन मंत्री सुनील बंसल का कार्यालय एक-एक को फोन करके जानकारी ले रहा है, ताकि आगे नाराजगी का सामना न करना पड़े।भाजपा के कार्यकर्ताओं में भी एक बात आम है कि 2022 के चुनाव में आधे विधायकों के टिकट कटेंगे। लखनऊ के एक नेता ने खुलासा किया है कि 43 प्रतिशत विधायकों के टिकट में कटौती हो सकती है। प्रयागराज के संघ से जुड़े एक बड़े नेता कहते हैं कि कार्यकर्ताओं की ज्यादा नाराजगी मौजूदा विधायकों से ही है। 33 प्रतिशत से अधिक के टिकट कट गए तब भी बात बन जाएगी। वह कहते हैं कि इसका संकेत तो अमित शाह भी देकर गए हैं।  

विधानसभा 2022 जीत का प्लान नंबर-2
दूसरी योजना की बात करते हैं। यूपी चुनाव को लेकर प्रदेश स्तरीय, प्रांत स्तरीय और क्षेत्रीय बैठकों में भाजपा एक बड़े संदेश के साथ आगे बढ़ रही है। वह अपने कार्यकर्ताओं, संघ के नेताओं को लगातार ताकीद कर रही है कि विधानसभा चुनाव 2022 को राष्ट्रीय, राष्ट्रवाद और प्रदेश के विकास के मुद्दे पर ही केंद्रित करने के लिए पूरा जोर है। यह हरगिज जातिवाद के मोड़ पर न जाने पाए।  प्रयागराज के नेता कहते हैं कि पार्टी का यह कदम काफी सोचा-समझा है। इसी में हमारी जीत का मंत्र है। भाजपा के भीतर खंगालिए तो इस प्लान नंबर-2 के दो स्वरुप निकल कर आ रहे हैं। पहला तो सीधे उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या से जुड़ा है। मौर्या के खेमे का मानना है कि प्रदेश में पिछड़ा और अन्य पिछड़ा वर्ग की संख्या ज्यादा है। 2017 के चुनाव में यह साथ था। इस बार बिदक रहा है। इसे सहेजने के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग के बड़े नेता को आगे लाना होगा। जाहिर है, यह केशव प्रसाद मौर्या ही हो सकते हैं। केशव प्रसाद मौर्या ने एक बार फिर केंद्र से मिले आशीर्वाद के बाद मौर्या, शाक्य, कोइरी, कुनबी, कुशवाहा समेत सभी के साथ तालमेल बढ़ाना शुरू कर दिया है।

जातिवाद के मुद्दे पर चुनाव प्रचार को लेकर सावधान है भाजपा  
प्लान नंबर-2 का दूसरा स्वरुप भाजपा के डर से जुड़ा है। भाजपा का यह भय भीतर उसे खाए जा रहा है और इसके संतुलन की कोशिश हो रही है। यह जातिगत मुद्दे पर चुनाव के चले जाने को लेकर है। हालांकि इसमें भाजपा के नेता ही अधिक जिम्मेदार बताए जा रहे हैं। समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव पिछड़ा वर्ग से हैं। जयंत चौधरी, ओमप्रकाश राजभर उनके साथ खड़े हैं। बसपा की मायावती के पास से दलित छिटक रहा है। ऐसे में जातिवादी मुद्दे पर चुनाव के जाने पर पिछड़ा, अन्य पिछड़ा वर्ग, गैर जाटव, अल्पसंख्यक वोट समाजवादी पार्टी के खेमे में जा सकता है। समाजवादी पार्टी के एक नेता ने भी माना कि उनका कार्यकर्ता तो इस मुद्दे पर पिछले एक साल से गांव-गांव प्रचार कर रहा है। गौतमपल्ली रोड पर समाजवादी पार्टी का कार्यालय संभाल रहे नेताजी बहुत कुछ नहीं कहना चाहते, लेकिन उनका कहना है कि तारीख नजदीक आने दीजिए। जो होगा, अप्रत्याशित होगा। 2012 की तरह चौंकाएगा।

भाजपा की रणनीति किसी भी सूरत में विधानसभा चुनाव को जाति के मुद्दे पर जाने से रोकना है। चुनाव के वातावरण को अनुच्छेद 370 की समाप्ति, राम मंदिर निर्माण, बाबा विश्वनाथ कारिडोर, राष्ट्रवाद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कामकाज, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विकास तक ही बनाए रखना है। बताते हैं कि संभव है कि आगे हिंदुत्व का मुद्दा केवल बैकग्राऊंड में ही चलता रहे।मजबूत प्रत्याशी ही बदलेगा 2022 की तस्वीर
भाजपा के संगठन से जुड़े नेता मानते हैं कि 2022 का विधानसभा चुनाव 2017 से थोड़ा सा अलग है। लेकिन केंद्र और प्रदेश की भाजपा मिलकर काम कर रही है। वह नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं कि सबकुछ अच्छा होगा। भाजपा को प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह बहुत ऊंचाई पर ले गए हैं। हम यह चुनाव जीतेंगे और मजबूत उम्मीदवार मैदान में उतारकर जीतेंगे। यह पूछने पर कि 300 के करीब तो अब आपके पुराने विधायक ही मैदान में होंगे। सूत्र का कहना है कि यह जरूरी नहीं है। लक्ष्य से बड़ा व्यक्ति नहीं होता। हमारे पास प्रधानमंत्री मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसा मजबूत चेहरा और काम है। बस विधानसभा में एक मजबूत उम्मीदवार जीत को आसान कर देगा। भाजपा हमेशा अच्छा उम्मीदवार देने में विश्वास करती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *