आध्यात्मिकता किसे कहते है
आत्मा और परमात्मा के मिलन को आध्यात्मिकता कहते है। जो मनुष्य अपने स्व पर संयम रख कर कार्य करता है,वही सही मायने मे अनुशासित कहलायेगा। मनुष्य वास्तविक सुख और शांति तभी प्राप्त कर सकता है जब उसमें आध्यात्मिकता का विकास हो जाये। मानव विकास के अंतिम तीन सोपान हैः आनंद, चित और सत् ,आनन्द वह स्थिति है जिसमेँ मनुष्य सुख-दुःख की अनुभूति ही नही करता । चित वह चेतना शक्ति है जिसमे मनुष्य अपने जगत के और सत के स्वरूप को जानता है और सत शुद्ध अस्तिय
त्व का नाम है ।यह केवल ईश्वर को प्राप्त है ,इस लिए सत्य ही ईश्वर है और ईश्वर ही सत है । ये तीनों आध्यात्मिक स्तर है। आत्मा परमात्मा के स्वरूप को जानना ही सच्चा ग्यान है।












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