अच्छे नहीं है हाल तो किसका कसूर है ? कवि सन्तोष शुक्ल समर्थ प्रयागराज
अच्छे नहीं है हाल तो किसका कसूर है ? बिगड़ी है सबकी चाल तो किसका कसूर है ?
हत्या, बलात्कार, लूट आम बात है, सड़कों पे है बवाल तो किसका कसूर है?
बच्चों को संस्कार की तालीम नही दी, आँगन में है दीवाल तो किसका कसूर है ?
पेड़ों पे पक्षियों की आमद नही रही, सूखे हुए हैं ताल तो किसका कसूर है ?
महँगाई भ्रष्टाचार से, बेरोजगारी से, जनता हुई बेहाल तो किसका कसूर है?
हमने तो चुनावों में वोट बेच दिया था, नेता हैं मालामाल तो किसका कसूर है?
जो थे समर्थ आज वहीं हाथ मल रहे, मन में उठे मलाल तो किसका कसूर है ? -सन्तोष शुक्ल समर्थ प्रयागराज











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