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हमारे सनातन धर्म ग्रंथो में पितरों को संदेशवाहक भी कहा गया है

हमारे सनातन धर्म ग्रंथो में पितरों को संदेशवाहक भी कहा गया है

शास्त्रों में बताया गया है कि ॐ अर्यमा तृप्यताम इदं तिलोदकं तस्मै स्वधा। ॐ मृर्त्योमा अमृतं गमय। अर्थात् अर्यमा पितरों के देव हैं जो सबसे श्रेष्ठ है उन अर्यमा देव को मैं प्रणाम करता हूँ।हे! पिता, पितामह, और प्रपितामह। हे! माता, मातामह और प्रमातामह आपको भी बारम्बार प्रणाम है, आप हमें मृत्यु से अमृत की ओर ले चलें आचार्य धीरज द्विवेदी “याज्ञिक” जी ने बताया कि इसका अर्थ है कि हम पूरे वर्ष भर अपने देवों को समर्पित अनेकों पर्वों का आयोजन करते हैं, लेकिन हममे से बहुत लोग यह अनुभव करते है की हमारी प्रार्थना देवों तक नही पहुँच पा रही है, आचार्य जी ने बताया कि हमारे पूर्वज देवताओं और हमारे मध्य एक सेतु का कार्य करते हैं,और जब हमारे पितृ हमारी श्रद्धा,हमारे भाव,हमारे कर्मों से तृप्त हो जाते हैं,हमसे संतुष्ट हो जाते हैं तो उनके माध्यम से हमारी प्रार्थना देवताओं तक बहुत ही आसानी से पहुँच जाती है और हमें मनवांछित फलों की शीघ्रता से प्राप्ति होती है…!
पितृ पक्ष में पित्तरों का श्राद्ध और तर्पण इस प्रकार करे
१:- पितृ पक्ष में प्रतिदिन पित्रों के निमित्त जल,काला तिल और पुष्प के साथ पित्रों का तर्पण करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और पितृ दोष दूर होता है।
२:- श्राद्ध पक्ष में अपने पित्रों की मृत्यु तिथि पर पिंडदान करें एवं किसी ब्राह्मण को अपने पूर्वजों की पसंद का भोजन अवश्य कराएं। ऐसा करने से भी पित्रों का आशीर्वाद प्राप्त होता है.!
३:- पितृ पक्ष में अपने पित्रों के मोक्षार्थ तथा पितृदोष निवारण हेतु अपने पित्रों के नाम से श्रीमद्भागवत कथा,भगवत गीता, गरूड़ पुराण,नारायण बली,त्रिपिंडी श्राद्ध,विष्णु सहस्रनाम,नारायण कवच,गजेन्द्र मोक्ष का पाठ एवं पितृ गायत्री मंत्र का जाप अपने सामर्थ्य अनुसार अवश्य करायें इससे पित्रों को शांति,एवं मोक्ष प्राप्त होता है.!
४:- श्राद्ध पक्ष में गया जी जाकर अपने पित्रों का श्राद्ध अवश्य करना चाहिए।ऐसा करने से भी आपके पितृगण मोक्ष को प्राप्त हो कर शांत होते हैं और आपको पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
५:- यदि आपको अपने पित्रों की मृत्यु तिथि नहीं पता है तो आप सर्व पितृ अमावस्या पर उनका श्राद्ध कर सकते हैं। ऐसा करने से भी आपको पितृ दोष से मु्क्ति मिलती है तथा पितृ प्रसन्न होते हैं।
६:- आपको सर्व पितृ अमावस्या पर किसी पवित्र नदी में स्नान अवश्य करना चाहिए और योग्य ब्राह्मण से अपने पित्रों का श्राद्ध कराना चाहिए और यथा शक्ति ब्राह्मणों को भोजन कराकर उन्हें अपने सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा देनी चाहिए।
७:- पितृ पक्ष में आपको कौवों को भोजन अवश्य कराना चाहिए।क्योंकि माना जाता है कि इस समय में हमारे पितृ कौवों का रूप धारण करके धरती पर उपस्थित रहते हैं।
८:- आपको पितृ पक्ष में गाय की सेवा अवश्य करनी चाहिए। आपको गाय को भोजन करना चाहिए और किसी गऊशाला में भी दान अवश्य देना चाहिए।तथा पित्र पक्ष में पंचबलि अवश्य करना चाहिए। जिसमें देव,गाय, अतिथि,चींटी,कुत्ता,और कौआ इन सबको भोजन अवश्य देना चाहिए।
आचार्य धीरज द्विवेदी “याज्ञिक”
(ज्योतिष वास्तु धर्मशास्त्र एवं वैदिक अनुष्ठानों के विशेषज्ञ)
संपर्क सूत्र – 09956629515
08318757871

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