वाल्मीक आश्रम प्रयाग में बना प्रदर्शन का केंद्र।।
साहित्यकार सन्तोष त्रिपाठी संत जी
प्रयागराज।करछना तहसील अंर्तगत लवटहा घाट आज कल पिकनिक प्लेस बन चुका है आश्रम के पास ही गंगा अपने पूरे वेग से बह रही है यहां पर आस पास के सैलानी गंगा तमसा टोस के संगम तट सपरिवार नहाने का आनंद ले रहे है। साथ ही बाटी, चोखा,बनाकर खा रहे है कई स्कूल के टीम भी वहा पिकनिक मना रही है।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर चंडिका प्रसाद शुक्ल,जबलपुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रहस बिहारी द्विवेदी,अग्रवाल कॉलेज सिरसा के डॉक्टर रमा शंकर तिवारी आदि विद्वानों ने अपने शोध में लिखा है कि वाल्मीक रामायण के अनुसार महर्षि वाल्मीक जी प्रयाग में भारद्वाज आश्रम से तीस मील दूर गंगा गंगा तमसा आज की टोस के संगम पर हमेशा स्नान कर श्री नाथ बाबा का नित्य दर्शन किया करते थे वहीं पास में पर्णसा आज का पनासा गांव में अपनी पर्ण कुटी में वास करते थे,वहीं सिरसा के पास वेदावली आज का बेदोली गांव में शिष्यों के साथ वेद पाठ किया करते थे,पास में आज का डीहा गांव में वाल्मीक जी तप करते हुए दीमक के ढूह हो गए थे, वही वाल्मीक जी के आश्रम में सीता जी रहती थी लव कुश भी वही पैदा हुए,गंगा जी के उस पार दूम दुमा गांव में दुम दूम नामक राक्षस का वध भी लव कुश ने किया था, ऐसा माना जाता है, भगवान राम के अश्वमेघ यज्ञ का घोड़ा भी लवकुश ने यही पकड़ा था हनुमान जी को युद्ध में हराकर सात पीपल के पेड़ में बाध दिए थे आज पवरिया वीर के नाम से वह स्थल प्रसिद्ध है वहीं पर प्राचीन पीपल का पेड़ भी शेष है।बूढवा मंगर के दिन विशाल मेला लगता है।।
एक बार वाल्मीक जी गंगा तमसा के संगम में स्नान कर रहे थे ,उसी समय एक बहेलिया आता है क्रोच क्रोची पक्षी का शिकार करता है।वहीं क्रोच का शिकार हुआ क्रोचि जोर जोर से रुदन करने लगी।यह देख वाल्मीक जी के मुख से श्राप निकल गया मा निषाद प्रतिष्ठाम त्वं गमा शाश्वती समा । हे शिकारी तुम कभी सुखी नहीं रहोगे।ऐसा सुनकर सभी देवता हाथ जोड़कर खड़े हो गए यह क्या कह दिया आपने भगवान शिव स्वयं आकर आश्चर्य चकित हुए। महर्षि के मुख से निकला हुआ वाक्य वापस नहीं हो सकता इस लिए आप के मुख से निकलने वाला श्लोक से रामायण की संरचना करो, यह श्लोक रामायण का पहला श्लोक हुआ।अर्थात असली वाल्मीक आश्रम यही पर है।आज प्रत्येक वर्ष वहा पर वाल्मीक जयंती पर साप्ताहिक कथा भागवत का आयोजन होता है प्रयाग के मानव संसाधन विकास मंत्री डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी ने इस स्थान को पर्यटन स्थल भी घोषित कराकर इसके विकाश के लिए मदद देकर इस आश्रम का विकास किया ।












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