ललित नारायण मिश्रा जी की 103वीं जयंती पर नई दिल्ली में श्रद्धांजलि समारोह

मिथिलांचल के विकास पुरुष को किया गया नमन, न्याय और भारत रत्न की मांग
नई दिल्ली स्थित द कॉन्स्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया, रफी मार्ग के स्पीकर हॉल में देश के महान नेता, पूर्व रेल मंत्री ललित नारायण मिश्रा जी की 103वीं जयंती के अवसर पर एक भव्य श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन उनके पौत्र वैभव मिश्रा द्वारा किया गया।
समारोह में बतौर अतिथि सांसद दीपेश चंद्र ठाकुर, पूर्व सांसद अश्वनी चौबे, पूर्व सांसद नवीन सिन्हा सहित देश के कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने ललित बाबू के व्यक्तित्व, कृतित्व और राष्ट्र निर्माण में उनके अतुलनीय योगदान पर अपने-अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम के दौरान अंतर्राष्ट्रीय मैथिली परिषद के अध्यक्ष शैलेन्द्र मिश्रा एवं पूर्व सांसद अश्वनी चौबे द्वारा एक संयुक्त प्रेस वार्ता भी आयोजित की गई।
मिथिला से राष्ट्रीय पहचान तक का सफर
प्रेस वार्ता में शैलेन्द्र मिश्रा ने बताया कि ललित नारायण मिश्रा का जन्म 2 फरवरी 1922 को मिथिला क्षेत्र के सुपौल जिले के बलुवा गांव में हुआ था। उन्होंने वर्ष 1948 में पटना विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की।
ललित बाबू ने अपने राजनीतिक जीवन में पिछड़े बिहार को मुख्यधारा से जोड़ने का ऐतिहासिक कार्य किया और मिथिलांचल को राष्ट्रीय पहचान दिलाई। विदेश मंत्री के रूप में उन्होंने कोसी योजना के अंतर्गत पश्चिमी नहर निर्माण हेतु भारत–नेपाल के बीच महत्वपूर्ण समझौता कराया।
मिथिला कला, भाषा और विकास के प्रणेता
ललित नारायण मिश्रा को मिथिला चित्रकला से विशेष लगाव था। उन्हीं के प्रयासों से यह कला देश-विदेश में पहचान बना सकी, जो आज मिथिला पेंटिंग के नाम से विश्वविख्यात है।
मिथिलांचल के विकास के लिए उन्होंने लखनऊ से असम तक लेटरल रोड को स्वीकृति दिलाई, जो मुजफ्फरपुर–दरभंगा–फारबिसगंज तक विस्तारित है।
रेल मंत्री के रूप में उन्होंने झंझारपुर–लौकहा, भपटियाही–फारबिसगंज सहित 36 रेल परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की, जो आज बड़ी रेल लाइनों के रूप में विकसित हो चुकी हैं।
मैथिली भाषा को संवैधानिक मान्यता
ललित बाबू को अपनी मातृभाषा मैथिली से अगाध प्रेम था। वर्ष 1963–64 में उन्होंने प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से पहल कर साहित्य अकादमी में मैथिली को भारतीय भाषाओं की सूची में शामिल कराया। आज मैथिली संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षाओं में चयनित विषयों में शामिल है।
बलिदान दिवस और अधूरा न्याय
2 जनवरी 1975 को दिल्ली से समस्तीपुर तक बड़ी रेल लाइन का उद्घाटन करते समय मंच से उतरते वक्त एक गहरी साजिश के तहत ललित बाबू पर हैंड ग्रेनेड से हमला किया गया। समय पर उचित चिकित्सा न मिलने के कारण 3 जनवरी 1975 को उनका निधन हो गया। यह दिन आज भी बलिदान दिवस के रूप में मनाया जाता है।
उनके अंतिम शब्द थे—
“हम रहें या न रहें, बिहार आगे बढ़ता रहेगा।”
दुखद तथ्य यह है कि अब तक ललित नारायण मिश्रा हत्याकांड में न्याय नहीं मिल पाया है।
सरकार से प्रमुख मांगें
अंतर्राष्ट्रीय मैथिली परिषद के अध्यक्ष शैलेन्द्र मिश्रा ने भारत सरकार से मांग की कि—
- ललित नारायण मिश्रा हत्याकांड की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में SIT गठित कर कराई जाए
- ललित बाबू को मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया जाए
- रेल मंत्री रहते हुए दिल्ली में उनके निवास को “ललित संग्रालय” के रूप में विकसित किया जाए, जिसमें मिथिला की संस्कृति, कला और इतिहास को प्रदर्शित किया जाए
कार्यक्रम का समापन “जय मिथिला, जय मैथिली” के उद्घोष के साथ हुआ।







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