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मातृ शिक्षा की महिमा



पढ़ने से पहले धीरे से अपनी आँखें बंद करें… और हृदय के अंदर परम शांति को महसूस करें… और पढ़ना जारी रखें…

मातृ शिक्षा की महिमा

यह कहानी न्यूयॉर्क के नाईब्रूट शहर की एक विधवा स्त्री की है। उस स्त्री का एक 8 साल का बच्चा था। वह बच्चा बड़ा ही शैतान और गुस्सैल था। वह हर छोटी छोटी बात पर गुस्सा करता था। विधवा होने के कारण अपने जीवन का निर्वाह करने के लिए उसे नौकरी करनी पड़ती थी। इस वजह से वह अपने बच्चे को ज्यादा समय नहीं दे पाती थी।

उसकी गैरमौजूदगी में वह बच्चा गलत संगत का शिकार हो गया और बचपन में ही वह अपने पास चाकू रखने लगा। वह चाकू धारधार रखता था। एक बार उसकी लड़ाई किसी बच्चे से हो गई, उसने अपना गुस्सा उस बच्चे पर उतारा और उसे चाकू मार दिया। भगवान की कृपा से वह बच्चा बच गया।

जब यह बात उसकी माँ को पता चली तो वो बहुत अधिक चिंतित हो गई। आप सभी सोच रहे होंगे कि उसकी माँ ने उसे बहुत डाँटा होगा, मारा होगा और गुस्सा किया होगा, पर उसकी माँ ने ऐसा कुछ भी नहीं किया। उसकी माँ ने उसे डांटने की बजाय या मारने की बजाय, एक नए तरीके से उसे समझाया।

उस स्त्री ने अपने बेटे को अपने पास बुलाया और कहा, “बेटा अपनी गली के आगे जो नाके पर एक डॉक्टर साहब रहते हैं, वह चाकू इतना अच्छा चलाते है, जिससे लोगों का दुख दर्द भी ठीक होता है, और उनसे उनकी प्रतिष्ठा भी बढ़ती है। आज उनके पास कितनी बड़ी गाड़ी है, कितने बड़े-बड़े बंगले हैं, क्या तुझे भी ऐसा बड़ा आदमी बनना है?”

यह बात सुनकर उसके बेटे ने खुश होकर कहा, “हाँ, मुझे भी बड़ा आदमी बनना है।” यह सुनकर उसकी माँ अंदर से बहुत ही खुश हुई और बेटे से बोली, “बेटा तू भी ऐसा चाकू चलाना सीख जिससे लोगों का दुख दर्द ठीक कर सके।”

उसकी माँ जब उसको यह बात बता रही थी, तब भी उसके बेटे के जेब में धारदार चाकू पड़ा था। यह पता होने के बावजूद भी उस स्त्री ने अपने बेटे से यह नहीं कहा कि तू इसको हटा दे या अपने से दूर कर दे। बस उसकी माँ ने उसे अच्छा काम करने के लिए प्रेरित किया और उसकी माँ के यह शब्द उसके दिमाग में इस तरह से घर कर गए मानो उसने अपने लिए कुछ एक अलग निश्चय कर लिया हो। उस बच्चे के दिमाग में बार-बार एक ही बात आ रही थी कि मैं चाकू चला कर इतना बड़ा आदमी बन सकता हूँ।

वह बच्चा कई सालों से अपनी क्लास पास नहीं कर पा रहा था। वह हर बार फेल हो जाता था। इस घटना के बाद उस लड़के के अंदर बहुत बड़ा परिवर्तन हो गया, वह हर रोज मन लगाकर पढ़ाई करने लगा और रोज लाइब्रेरी से दो किताबें लाता और उसे पढ़ता। उसने पढ़ना बहुत मन से जारी रखा और आप लोगों को यह जानकर बहुत ही ताज्जुब होगा कि वह लड़का बहुत बड़ा डॉक्टर बन गया। वह साधारण डॉक्टर नहीं बल्कि बहुत बड़ा न्यूरो सर्जन बना। वह सिर्फ अपनी 33 की उम्र में जैन हॉकिंग इंस्टिट्यूट में प्रियाटिक न्यू सर्जन डिपार्टमेंट में बड़ा हेड बनाया गया था और वह न्यूयॉर्क का बहुत बड़ा जाना माना डॉक्टर बन गया।

उस आदमी को न्यूयॉर्क का सबसे बड़ा सिविल अवार्ड मिला। उस बच्चे के अंदर हुए परिवर्तन में उनकी माँ ने सिर्फ उनको चाकू कैसे चलाना है, यह समझाया।

उन्होंने एक ऐसा ऑपरेशन किया जो करीबन 22 घंटे तक चला और वह दो जुड़वा बच्चे, जो सिर से जुड़े हुए थे उनको अलग करने का ऑपरेशन था। और वह ऑपरेशन बहुत ही सफल रहा।

उनको अपनी जिंदगी में जितने भी अवार्ड मिले, उन्हे उन्होंने अपनी माँ को समर्पित किए थे। मातृत्व शिक्षा जैसी शिक्षा जीवन में और कोई नहीं हैं ।

एक माँ के विवेक ने अपने बेटे की गलत आदत का विरोध नहीं किया बल्कि उसे सही दिशा दे दी और उसके जीवन को सार्थक बना दिया।

“हमारे जीवन का एक ही लक्ष्य होने पर हम अपने आन्तरिक संसाधनों का पूर्ण उपयोग करके वहाँ तक पहुँच सकते हैं। ”
दाजी

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