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इक्कीसवीं सदी में भी किसानों की आत्महत्या नही रूकी।

इक्कीसवीं सदी में भी किसानों की आत्महत्या नही रूकी।

देश का किसान कर्ज से परेशान।।

संतोष त्रिपाठी संत जी राष्ट्रीय महासचिव
भारतीय किसान कल्याण संघ से बात चीत का एक अंश।

वाराणसी। भारतीय किसान कल्याण पर आज तक कोई सकारात्मक पहल नही हो सकी। सन 2000 के पहले,विधर्भ महाराष्ट्र, उड़ीसा, छत्तीसगढ़,के किसान ज्यादा तर आत्महत्या करते 2000. से 2020 या अभी तक उत्तर प्रदेश के बुन्देलखण्ड और पूर्वांचल में भी आत्महत्या बढ़ी है पहले 10,000 सालाना दर था आत्महत्या का अब सत्तर किसान हर महीने आत्महत्या से जुझ रहे हैं,जिसमें यू पी में भी आत्म हत्या की दर बढ़ी है। समय रहते इस पर ध्यान न दिया गया तो ये दर बढ़ती जाएगी। आइए जानते हैं कि मुख्य वजह क्या है। सबसे पहली वजह किसानों को अनाज का बहुत मुल्य न मिलना।जमीन पर बड़े पुजीपतियो का वर्चस्व होना,मौसम की मार झेलना, आवारा पशुओं से खेती का बर्बाद होना,बाढ़, ओलावृष्टि से आहत होना, किसानों को महंगा खाद बीज मिलना,भंडारण की सुविधा न होने से औने पौने दाम में बेचने पर मजबुर होना।सरकार की उदासीन रवैया।पानी की सुविधा न होना,नहरों का विस्तार न होना। किसानों को नई तकनीकी खेती का प्रशिक्षण न होना।सरकार की योजना सीधे किसान तक न पहुंचना।कर्ज से डुब जाना।जमीन की जांच व उपजाऊ पन का सही आकलन न होना,जमीन का केमिकल के कारण क्षरण या उपजाऊ पर कम होना।देशी खाद का प्रोसेस युनिट न होना, आधुनिक तकनीकी शिक्षा की कमी, किसानों की मजदूरी,शहरी मजदूरी की तुलना में बहुत कम होना आदि समस्याओं के कारण किसान आत्महत्या करता है।
भारत किसानों का देश है जहां देश का रीढ़ किसान है हरित क्रांति में किसानो को कुछ फायदा हुआ लेकिन आज किसान मजदूर बनने पर मजबुर हो रहा है।
भारतीय किसान कल्याण संघ का उद्देश्य हर हाथ को काम हर खेत को पानी।खाद बीज सस्ता देकर , अनाज की कीमत सही देकर सभी समीक्षाएं कर समृद्धशाली किसान बनाकर देश का सही विकास संभव है।आज जरूरत है हर ब्यक्ति को चिंतन कर भारतीय किसान कल्याण के काम में लगने की।जब तक किसान मजबूत नहीं होगा, देश शसक्त नहीं होगा। आइए हम सभी मिलकर किसान कल्याण संघ का सदस्य बनकर राष्टृ निर्माण में अपना योगदान दे।
युवाओं को सबसे पहले आगे आना होगा। तकनीकी से आय बढ़ाकर अपना मालिकाना हक लेना होगा।। किसान दिवस पर विशेष।।जय किसान जय जवान जय हिंदुस्तान।।

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