Jan Media TV

Inform Engage Inspire

Advertisement

जन्माष्टमी विशेष -भगवान श्री कृष्ण का स्वरूप

जन्माष्टमी विशेष -भगवान श्री कृष्ण का स्वरूप

जन्माष्टमी विशेष –
भगवान श्री कृष्ण का स्वरूप
भगवान श्री कृष्ण एक तरफ वंशीधर हैं तो दूसरी तरफ चक्रधर।
एक तरफ माखन चुराने वाले हैं तो दूसरी तरफ सृष्टि को खिलाने वाले।
वो एक तरफ बनवारी हैं तो दूसरी तरफ गिरधारी।
वो एक तरफ राधारमण हैं तो तो दूसरी तरफ रुक्मणि हरण।
कभी शांतिदूत तो कभी क्रांतिदूत।कभी यशोदा तो कभी देवकी के पूत।
कभी युद्ध का मैदान छोड़कर भागने का कृत्य तो कभी सहस्त्र फन नाग के मस्तक पर नृत्य।
जीवन को पूर्णता से जीने का नाम कृष्ण है।जीवन को समग्रता से स्वीकार किया श्री कृष्ण ने। परिस्थितियों से भागे नहीं उन्हें स्वीकार किया।
भगवान श्री कृष्ण एक महान कर्मयोगी थे उन्होंने अर्जुन को यही समझाया कि हे अर्जुन माना कि कर्म थोड़ा दुखदायी होता है लेकिन बिना कर्म किये सुख की प्राप्ति भी नहीं हो सकती।
यदि कर्म का उद्देश्य पवित्र व शुभ हो तो वही कर्म सत्कर्म बन जाता है।
।। श्रीकृष्णाय वयं नुम: ।।
।। सबका मंगल हो ।।

आचार्य धीरज द्विवेदी “याज्ञिक”
(ज्योतिष वास्तु धर्मशास्त्र एवं वैदिक अनुष्ठानों के विशेषज्ञ)
प्रयागराज।
संपर्क सूत्र-09956629515
08318757871

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *