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जरूरत पड़ने पर रिश्ते की किताब से गलती का पन्ना इसलिए फाड़ देना चाहिए ताकि रिश्तों में मजबूती बनी रहे

आज का प्रेरक विचार

जरूरत पड़ने पर रिश्ते की किताब से गलती का पन्ना इसलिए फाड़ देना चाहिए ताकि रिश्तों में मजबूती बनी रहे। जिस प्रकार गलती हो जाने पर डायरी नहीं फेंकी जाती अपितु गलती वाला पन्ना फाड़ दिया जाता है। ठीक इसी प्रकार अगर रिश्तों में कभी गलती हो जाए तो रिश्ते को तोड़ने की बजाए गलती वाले पन्ने को फाड़कर रिश्ते को बचा लेना ही बुद्धिमानी है।
अविश्वास उस कमजोर ईंट के समान है जो हमारे संबंधो की मजबूत दिवार को गिराने का कारण बनता है। इसलिए संबधों की मजबूती के लिए परस्पर विश्वास प्रथम आवश्यक है। विश्वास की ईंट जितनी मजबूत होगी हमारे संबंध भी उतने ही टिकाऊ होंगे।

विश्वास ही संबंधों को प्रेमपूर्ण बनाता है। जब हमारे द्वारा प्रत्येक बात का मुल्यांकन स्वयं की दृष्टि से किया जाता है तो वहाँ अविश्वास जरूर उत्पन्न हो जाता है। जरूरी नहीं कि हर बार हमारे मुल्यांकन करने का दृष्टिकोण सही हो इसलिए संबंधों की मधुरताके लिए अपने दृष्टिकोण के साथ-साथ दूसरे की भावनाओं को महसूस करने का गुण भी हमारे भीतर जरूर होना चाहिए।

संबध जोड़ना महत्वपूर्ण नहीं अपितु संबंध निभाना महत्वपूर्ण है। अतः संबंधों का जुड़ना संयोग हो सकता है मगर संबंधों को निभाना जीवन की एक साधना ही है।

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