भगवान के असली दूत कौन हैं?
कॉफ़ी-शॉप
झुंझुनू के निकट एक कस्बा अपनी खुशहाली के लिए प्रसिद्ध था। एक बार एक व्यक्ति उस कस्बे की खुशहाली का कारण जानने के लिए सुबह-सुबह वहाँ पहुँचा। कस्बे में घुसते ही उसे एक कॉफ़ी-शॉप दिखायी दी। उसने मन ही मन सोचा कि मैं यहाँ बैठ कर चुप-चाप लोगों को देखता हूँ और वह शॉप के अंदर लगी एक कुर्सी पर जा कर बैठ गया।
कॉफ़ी-शॉप शहर के रेस्टोरेंट की तरह ही थी, पर वहाँ उसे लोगों का व्यवहार कुछ अजीब लगा।
एक आदमी शॉप में आया और उसने दो कॉफ़ी के पैसे देते हुए कहा, “दो कप कॉफ़ी, एक मेरे लिए और एक उस दीवार पर।”
व्यक्ति दीवार की तरफ देखने लगा लेकिन उसे वहाँ कोई नज़र नहीं आया, पर फिर भी उस आदमी को कॉफ़ी देने के बाद वेटर दीवार के पास गया और उस पर कागज़ का एक टुकड़ा चिपका दिया, जिस पर “एक कप कॉफ़ी” लिखा था।
व्यक्ति समझ नहीं पाया कि आखिर माजरा क्या है, उसने सोचा कि कुछ देर और बैठता हूँ, तो शायद समझ पाऊँ।
थोड़ी देर बाद एक गरीब मजदूर वहाँ आया, उसके कपड़े फटे-पुराने थे पर फिर भी वह पूरे आत्म-विश्वास के साथ शॉप में घुसा और आराम से एक कुर्सी पर बैठ गया।
व्यक्ति सोच रहा था कि एक मजदूर के लिए कॉफ़ी पर इतने पैसे बर्बाद करना कोई समझदारी नहीं है …तभी वेटर मजदूर के पास आर्डर लेने पहुँचा।
“सर, आपका आर्डर प्लीज!” वेटर बोला।
“दीवार से एक कप कॉफ़ी।” मजदूर ने जवाब दिया।
वेटर ने मजदूर से बिना पैसे लिए एक कप कॉफ़ी दी और दीवार पर लगी ढेर सारे कागज के टुकड़ों में से “एक कप कॉफ़ी” लिखा एक टुकड़ा निकाल कर कचरे के डिब्बे में फेंक दिया।
व्यक्ति को अब सारी बात समझ आ गयी थी। कस्बे के लोगों का ज़रूरतमंदों के प्रति यह रवैया देखकर वह भाव-विभोर हो गया … उसे लगा, सचमुच लोगों ने मदद का कितना अच्छा तरीका निकाला है, जहाँ एक गरीब मजदूर भी बिना अपना आत्मसम्मान कम किये एक अच्छी-सी कॉफ़ी-शॉप में खाने-पीने का आनंद ले सकता है।
अब वह कस्बे की खुशहाली का कारण जान चुका था और इसी खुशी के रहस्य के साथ वापस अपने शहर लौट गया।
अपनी प्रचुरता को उनके साथ बाँटें जो असमर्थ हैं। उदारता हमारी स्वाभाविक दशा है। जब आपका हृदय बिना अहंकार के मानवता की सेवा के लिए तैयार होता है, तब विनम्रता हमारे भीतर से रिसने लगती है। हृदय के आनंद, प्रेम और जोश के साथ सेवा करने से नई आध्यात्मिक ऊंचाइयों खुलने लगती है।
*"अपने साथी मनुष्यों को प्रेरित और प्रोत्साहित करना हमारा कर्तव्य है। मानवता के एक हिस्से की विफलता पूरी मानवता के लिए एक विफलता है।"*
दाजी












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