किसी फूल के गिर जाने से क्या उसकी खुशबू और सुंदरता कम हो जाती है?
गिरे हुए फूल
दौड़ना एक सामान्य प्रक्रिया है। दौड़ने की खूबसूरती यह है कि मैं अपने आसपास जीवन को घटित होते देखती हूँ। हर सुबह मैं एक बुजुर्ग सज्जन को पेड़ के नीचे गिरे हुए फूलों को उठाकर मंदिर के दर्शन के लिए बनाई गई टोकरी में रखते हुए देखती हूँ। उनकी गतिविधि मुझे उत्सुक कर रही थी।
एक सुबह मैंने उन्हे फिर से देखा और अपनी इस जिज्ञासा को शांत करने का फैसला लिया कि वह गिरे हुए फूल क्यों उठाते है, जबकि मैं अन्य बुजुर्ग लोगों को ताजे फूल तोड़ते हुए देखती हूँ।”
मैंने उनसे पूछा, “चाचाजी, मैं आपको हमेशा जमीन से इन ताजे गिरे हुए फूलों को उठाते हुए देखती हूँ। आप इनके साथ क्या करते हो?
“यह फूल मैं अपने घर में देवी और देवताओं के चरणों में अर्पित करता हूँ।” उन्होंने बड़े ही शांत भाव से उत्तर दिया।
मैंने यह पहली बार सुना था। ऐसा कुछ पहले नहीं सुना। तो, मैंने उनसे फिर पूछा, “अगर आप बुरा ना माने तो क्या मैं यह जान सकती हूँ कि जब पेड़ पर इतने सारे फूल लगे हैं, तो आप ईश्वर को गिरे हुए फूल क्यों चढ़ाते हो?”
“मैं फूलों की उनके अंतिम दिनों में भगवान के साथ रहने के उद्देश्य को पूरा करने में मदद कर रहा हूँ। उनके पास भी जीवन है, वे भी अपने अंत के दिनों में आपकी और मेरी तरह परमेश्वर के साथ रहना चाहते हैं, है ना?” उन्होंने मुझसे पूछा। मैंने भी सिर हिलाया फिर उन्होंने कहा, “कुछ लोग उन कलियों को तोड़ते हैं, जो अभी तक खिली ही नहीं हैं और कुछ केवल ऐसी कलियों को तोड़ते हैं जो अभी-अभी खिली हैं, उन्हें अपनी सुगंध भी छोड़ने नहीं देते हैं। हर कोई जो सुंदर है उसे लेता है और पौधे से उसकी सुंदरता को छीन लेता है। देखिए, कैसे दिख रहे हैं ये पौधे, बेरंग और वीरान।”
उन्होंने आगे कहा, “हर फूल का एक उद्देश्य होता है, भगवान के साथ रहना। जबकि हर कोई उन फूलों को ले जाता है जो पौधों पर लगे होते हैं, मैं उन्हें नहीं चुनता हूँ। यह उन फूलों की गलती नहीं है कि वे गिर गए। वे भी भगवान के साथ रहने के लायक हैं। आप भी इसे आजमाएँ, इसे करने से आपको शांति और खुशी मिलेगी। मुझे मिली है, इसलिए मैंने ऐसा किया। मैं इस बुढ़ापे मैं किसी को सहारा तो नहीं दे सकता लेकिन मैं इन फूलों को उनके लक्ष्य को पूरा करने में तो मदद कर सकता हूँ।”
मैने बस सिर हिलाया, मुस्कुराई, उन्हे शुभकामनाएँ दी और अपनी दौड़ जारी रखी।
जब मैं दौड़ रही थी तो मेरा मन भी दौड़ रहा था। इस नई प्रेरणा और विचार के साथ, मैंने फैसला किया कि मुझे भी पूजा के लिए गिरे हुए फूलों को लेने की कोशिश करनी चाहिए।
मैंने एक गुड़हल के पेड़ को पार किया और देखा कि पेड़ के नीचे कुछ फूल गिरे हुए हैं। जैसे ही मैं लेने के लिए नीचे झुकी, मुझे एक आवाज सुनाई दी।
“तुम गिरे हुए फूल भगवान को नहीं चढ़ा सकते हो।” मेरे मन में मेरी माँ ने मुझसे कहा और फिर मैं एक पल के लिए रुक गयी।
“भगवान केवल आपकी भावना और भक्ति की तलाश कर रहे हैं, इसलिए आगे बढ़ो और उठाओ।” यह फिर से मेरे मन ने मेरी माँ से कहा।
मन की इस उधेड़बुन के कुछ पलो बाद, मैंने फूलों को उठाया और अपनी हथेलियों पर रख दिया जैसे ही मैंने फूलों को उठाकर अपनी हथेलियों पर रखा, मेरे रोंगटे खड़े हो गए और मेरा ह्रदय तेजी से धड़कने लगा। यह एक बहुत ही अलग तरह का प्यार था जिसे मैं अपने शरीर के अंदर इन फूलों के लिए महसूस कर रही थी।
मैंने उन फूलों को घर ले आई, उन्हें धोया और उन्हें वहीं रख दिया, जहाँ उन्हें होना चाहिए, भगवान के चरणों में!
यह पूरा अनुभव जबरदस्त था। मुझे अपने भीतर बहुत अच्छा महसूस हो रहा था। मुझे ऐसा लगा जैसे मैंने किसी की जान बचाई हो या किसी को उसके दुख से बाहर आने में मदद की हो। मैंने फूलों के साथ इस स्तर की संतुष्टि पहले कभी भी महसूस नहीं की थी और मुझे लगता है, मैं ऐसा आगे भी करती रहूँगी। उठाओ जो गिर गया हो।
जीवन में, हम हमेशा अच्छे और सुंदर लोगों के आसपास रहना चाहते हैं। हम अपने आप को उन लोगों के साथ देखना चाहते हैं जो हमारे कद के हैं और अपने कद से नीचे के लोग है हम उन्हें नीचा देखना चाहते हैं।
लेकिन, असली संतुष्टि तब मिलती है जब हम किसी की मदद करते हैं और उनके जीवन को बेहतर बनाते हैं। चाहे वह इंसान हो, जानवर हो, पक्षी हो या जीवन का कोई अन्य रूप।
तो फूल क्यों नहीं,
गिरे हुए फूल।
*"स्वयं को दिव्य शक्ति के अधीन रखकर प्रेम और दृढ़ विश्वास के साथ सेवा करें तो चाहे यह सक्रिय सेवा हो या निष्क्रिय, पर्याप्त है। इसका उद्देश्य पूर्ण हो जाता है। स्वयं को अर्पित करने के कई तरीके हैं। सेवा के लिए स्वयं को प्रस्तुत करने मात्र से यह हमारी दशा को बेहतर बना देती है।"*
दाजी












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