Jan Media TV

Inform Engage Inspire

Advertisement

क्या हम जानते हैं, हमारे शब्दों मे कितनी ताकत है?

क्या हम जानते हैं, हमारे शब्दों मे कितनी ताकत है?

क्या हम जानते हैं, हमारे शब्दों मे कितनी ताकत है?

प्रेम के शब्द

टालस्टाय एक दिन सुबह एक गाँव की सड़क से निकले। एक भिखारी ने हाथ फैलाया। टालस्टाय ने अपनी जेब तलाशी लेकिन जेब खाली थी। वह सुबह सैर के लिए निकले थे इसलिए उनके पास पैसे नहीं थे।

उन्होंने कहा, “मित्र ! क्षमा करो, मेरे पास पैसे नहीं हैं। तुम ज़रूर दुखी होगे, लेकिन मैं मजबूरी में पड़ गया हूँ। क्षमा करो भाई, मेरे पास तुम्हें देने के लिए अभी कुछ भी नहीं हैं।”

यह शब्द सुनकर वह भिखारी एक पल के लिए ठहर गया, फिर उसने कहा ,”कोई बात नहीं। तुमने मित्र कहा! मुझे बहुत कुछ मिल गया।..तुमने मुझे भाई कह कर पुकारा ! तुमने मुझे बंधु कहा! आज तक मुझ पर दया करके लोगों ने मुझे पैसे और ज़रूरत की कई चीज़ें दीं, लेकिन तुमने जो दिया है, वह किसी ने भी नहीं दिया था। मैं बहुत अनुगृहीत हूँ, कृतज्ञ हूँ!” कहते कहते वह रो पड़ा।

मित्र! एक शब्द प्रेम का उस भिखारी के हृदय में क्या निर्मित कर गया, क्या बन गया। टालस्टाय सोचने लगे। उस भिखारी का चेहरा बदल गया, वह दूसरा आदमी मालूम पड़ा।

यह पहला मौका था कि किसी ने उससे कहा था, “मित्र!” भिखारी को कौन मित्र कहता है? इस प्रेम के एक शब्द ने उसके भीतर एक क्रांति कर दी, वह दूसरा आदमी बन गया। उसकी हैसियत बदल गयी, उसकी गरिमा बदल गयी, उसका व्यक्तित्व बदल गया। वह दूसरी जगह खड़ा हो गया। वह पद-चलित एक भिखारी नहीं है, वह भी एक मनुष्य है। उसके भीतर एक नया निमार्ण शुरू हो गया। प्रेम के एक छाेटे से शब्द ने.. उसे उसके अस्तित्व का बोध करा दिया..

प्रेम ही जीवन है। प्रेम ही सृजनात्मक है। प्रेम का हाथ जहाँ भी छू देता है, वहाँ क्रांति हो जाती है, वहाँ मिट्टी सोना हो जाती है। प्रेम का हाथ जहाँ स्पर्श देता है, वहाँ अमृत की वर्षा शुरू हो जाती है।

दोस्तों हमारा ह्रदय अनंत प्रेम का भंडार है, ज़रूरत है बस ह्रदय का दरवाज़ा खोलने की
“अच्छी तरह से, विनम्रता से, प्रेम से बात करें – ऐसा करने से यह स्वयं स्रोत के साथ संपर्क बनाए रखेगा। यही वह सबसे महत्त्वपूर्ण बात है जो मुझे पता चली और इसने मेरा जीवन बदल दिया।”
दाजी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *