Jan Media TV

Inform Engage Inspire

Advertisement

440 वर्ष पूर्व 1580 ई. में महाराणा प्रताप द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक, वो भी तब जब 60 फीसदी मुगल आधिपत्य वाले हिंदुस्तान के बीच मेवाड़ घिरा हुआ था”

440 वर्ष पूर्व 1580 ई. में महाराणा प्रताप द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक, वो भी तब जब 60 फीसदी मुगल आधिपत्य वाले हिंदुस्तान के बीच मेवाड़ घिरा हुआ था”

“440 वर्ष पूर्व 1580 ई. में महाराणा प्रताप द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक, वो भी तब जब 60 फीसदी मुगल आधिपत्य वाले हिंदुस्तान के बीच मेवाड़ घिरा हुआ था”

महाराणा प्रताप ने मालवा के मुगल थाने पर आक्रमण करने के लिए दानवीर भामाशाह के भाई ताराचन्द कावड़िया को मालवा में रामपुरा की तरफ भेजा। मालवा में बस्सी नामक स्थान पर ताराचन्द का मुकाबला मुगल सेनापति शाहबाज खां से हो गया। ताराचन्द घोड़े से गिर गए व बुरी तरह ज़ख्मी हो गए। बस्सी के राव साईंदास देवड़ा ताराचन्द को अपने घर ले गए व उनका उपचार किया।

महाराणा प्रताप को जब ताराचन्द के ज़ख्मी होने का पता चला, तो महाराणा ने दरबार बुलाकर कहा कि भामाशाह और ताराचंद ने मुश्किल दिनों में मेवाड़ को नया जीवनदान दिया, अब ताराचंद के प्राण बचाना हमारा कर्तव्य हुआ।

महाराणा ने तकरीबन 500 घुड़सवारों के साथ फौरन मालवा कूच किया। मालवा पर मुगलों का अधिकार था, जिस वजह से महाराणा प्रताप का वहां जाना लगभग असम्भव था, यहां तक की महाराणा के लिए मेवाड़ की सीमा पार करना भी एक चुनौती थी, पर महाराणा प्रताप ताराचन्द तक पहुंचने में सफल हुए और मालवा से निकले।

मालवा से मेवाड़ के रास्ते में जितने भी मुगल थाने आए, महाराणा प्रताप ने उनको न सिर्फ हटाया, बल्कि मालवा के सबसे बड़े मुगल थाने दशोर (वर्तमान में मन्दसौर) को तहस-नहस करते हुए ताराचन्द को सुरक्षित चावण्ड ले आए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *