वामपंथियों और संघ ने एक ही समय में एक क्षत्रिय राजा को अच्छा ,तो दूसरे क्षत्रिय राजा को बुरा बताकर क्षत्रियों के विरुद्ध कूटनीतिक षड्यंत्र किया है। महाराणा प्रताप और मानसिंह उसके उदाहरण हैं।
महाराणा प्रताप और मानसिंह उस समय के 2 बहुमूल्य रत्न थे। जिनकी वजह से भारत में सनातन संस्कृति जीवित बची रही।
16 वीं शताब्दी में जिस समय तोपों से लैस मुगलो का देश पर कब्जा हो रहा था। उस समय दक्षिणी ,पूर्वी एवं मध्य भारत के अधिकांश हिस्सों पर तोपों से लैस पठानों का कब्जा था।
उस समय महाराणा प्रताप और मानसिंह जैसे कुछ ही क्षत्रिय राजा बचे थे। और उन क्षत्रिय राजाओं के पास हथियार के नाम पर तलवार और भाले थे।
तोपों के साए में क्षत्रिय राजाओं ने कूटनीतिक एवं रणनीतिक रूप से, हथियार के रूप में,केवल तलवार और भालों के साथ,इस देश में विदेशी आक्रमणकारियों का पूर्ण रूप से कब्जा नहीं होने दिया।
यह #निष्पक्ष अध्ययन का विषय होना चाहिए था। लेकिन क्षत्रियों के प्रति पूर्वाग्रह एवं ईर्ष्या के कारण 16 वीं शताब्दी की तत्कालीन संकटकालीन परिस्थितियों का कोई निष्पक्ष अध्ययन करना ही नहीं चाहता।
अगर 16 वीं शताब्दी में मुगल और पठान एक दूसरे के #शत्रु ना होते । तो आज भारत में सनातन ,सिख ,पारसी, जैन ,बौद्ध धर्म का अस्तित्व नहीं होता।
पारसियों को अपने देश पर्सिया से जान बचाकर भारत में ही शरण लेनी पड़ी। पारसी लोग अपनी जान बचाने के लिए यूरोप की ओर नहीं भागे। क्योंकि पारसी भारत में अपने को सुरक्षित समझते थे।
ऐसी ही संकटकालीन एवं विपरीत परिस्थितियों में तत्कालीन राजाओं को ही निर्णय लेना था।
16 वीं शताब्दी में तत्कालीन राजाओं द्वारा जो निर्णय लिए गए , वह सही थे या गलत। यह तो निष्पक्ष अध्ययन का विषय है।
लेकिन तत्कालीन राजाओं द्वारा लिए गए सही या ग़लत निर्णयों की वजह से ही आज भारत में सभी धर्मों का अस्तित्व बना हुआ है।
अगर निष्पक्ष रुप से विचार करें ।तो अधिकांश मध्य एशिया क्षेत्र,बौद्ध धर्म के प्रभाव में था। लेकिन अब अधिकांश मध्य एशिया में बौद्ध धर्म का अस्तित्व नजर नहीं आता।
आलोचना का अधिकार उसे होता है। जिनके पूर्वजों ने अपने कर्तव्यों का पालन किया होता है।
वामपंथी एवं संघ सहित अन्य वर्गों के लोग राजा मानसिंह पर टिप्पणी करते हैं ।तो टिप्पणी करते समय कम से कम ,उन्हें अपने पूर्वजों के योगदान अथवा #कायरता के बारे में भी बताना चाहिए।
मूर्खो को ये समझना चाहिए कि , अगर #मान सिंह अकबर के अधीन थे ।तो फिर कैसे मान सिंह ने उस समय पूरे देश मे इतने हिन्दू मन्दिर बनवाये ?
बहुत कम लोगो को जानकारी है ,कि
मथुरा,अयोध्या, काशी, दिल्ली,बिहार,राजस्थान, द्वारिका,जगन्नाथ पुरी इन सभी जगहों पर आज भी राजा मान सिंह द्वारा बनाये गए मन्दिर,घाट मौजूद हैं…
सिकंदर लोदी द्वारा तोड़े गए काशी विश्वनाथ मन्दिर का निर्माण भी राजा मान सिंह ने 1585 में करवाया था!
मथुरा का मानसी घाट , काशी का मान सिंह घाट की हरिद्वार हर की पौड़ी सब कुछ राजा मान सिंह की देन है !
हल्दीघाटी के युद्ध में जब महाराणा प्रताप का घोड़ा चेतक घायल हो गया ।तो आसिफ खान ने मानसिंह से महाराणा प्रताप का पीछा करने को कहा ।लेकिन मानसिंह ने इंकार कर दिया। मानसिंह की इस बात से नाराज होकर, अकबर ने 6 महीने तक मानसिंह को नजरबंद कर दिया।
मानसिंह भी चाहते थे कि महाराणा प्रताप सुरक्षित रहें। क्योंकि उस समय की तत्कालीन दुरुह परिस्थितियों के कारण,मानसिंह अपने बाबा द्वारा अकबर को दिए गए वचन से वचनबद्ध थे।
भगवान बुद्ध कहते हैं कि जब राज्य पर संकट हो। तो प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि राज्य की रक्षा के लिए अपने कर्तव्यों का पालन करे।
आज जो वर्ग यह कहकर अपने पूर्वजों की कायरता पर पर्दा डालते हैं कि हमारे पूर्वजों को लड़ने ही नहीं दिया गया।
तो उन्हें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि कोल, भील, राजभर आदि जातियां भी राज्य पर संकट आने की स्थिति में स्वेच्छा से राज्य के लोगों की रक्षा के लिए लड़ती थीं।
लेकिन बड़ी विडंबना है कि जिन लोगों के पूर्वजों ने राज्य की और राज्य के लोगों की रक्षा के अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं किया ।आज उन्हीं के वंशज अपने कायर पूर्वजों की आलोचना करने के बजाए ,अपना रक्त बहाने वाले क्षत्रियों की आलोचना का कोई मौका नहीं छोड़ते।
अरब, तुर्क, मुगल और पठान सैन्य रूप से इतने मजबूत थे कि उन्हें किसी भी राज्य को जीतने में 10 वर्ष से अधिक का समय नहीं लगता था।
और ऐसे ही मजबूत सैन्य ताकतों से क्षत्रियों ने कई शताब्दियों तक संघर्ष कर, इस देश में सनातन, जैन, बौद्ध, सिख एवं पारसी धर्म एवं संस्कृति के अस्तित्व को नष्ट नहीं होने दिया।
नोट:- जिस देश के लोगों को क्षत्रियों का आभार प्रकट करना चाहिए ।उस देश में उन क्षत्रियों में कमियां निकाल कर उनका उपहास उड़ाने का प्रयास किया जाता है। इसलिए यह देश निश्चित ही आगे आने वाले समय में #गृह युद्ध के कगार पर खड़ा होगा ।क्योंकि इस देश में बलिदान देने वालों के प्रति ईर्ष्या का भाव रखा जाता है।
क्षत्रिय क्षत्रियविरासत राजपुताना भारतवर्षे आर्यावर्ते
जय माॅं भवानी ⚔️🙏
जय एकलिंग महाराज ⚔️🙏













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