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क्या हमने कभी सोचा है कि जीवन की बहुत सारी चिंताओं का कारण उनके प्रति हमारा मनोभाव (attitude) है?

क्या हमने कभी सोचा है कि जीवन की बहुत सारी चिंताओं का कारण उनके प्रति हमारा मनोभाव (attitude) है?

क्या हमने कभी सोचा है कि जीवन की बहुत सारी चिंताओं का कारण उनके प्रति हमारा मनोभाव (attitude) है?

मनोभाव

यह बात उस समय की हैं जब नेपोलियन कई प्रांतों को जीतकर और वहाँ से लूटे हुए खजाने के साथ फ्रांस लौट रहा था। उनकी सेना के पास कई प्रांतों से लूटे हुए खजाने थे। ये खजाने कुछ गधों एवँ कुछ घोड़ों पर लदे हुए थे और कुछ खजानों से भरे थैले सैनिकों ने अपनी पीठ पर लादे हुए थे।

उनमें से एक सैनिक जब अपनी पीठ पर थैला लिए चल रहा था तो उसके मन में कई विचार आ रहे थे। वह सोच रहा था कि मैं यह सब भार क्यों ढो रहा हूँ। यह थैला कितना भारी है पता नहीं इसमें क्या भरा हुआ है। मुझे बहुत भूख भी लगी है। मेरे लिए बहुत ही मुश्किल हो रहा है, इस ठंड में चलना। मुझे लगता है कि अगर में ऐसे ही भूखे प्यासे चलता रहा तो थोड़ी देर में मैं मर जाऊँगा।

जब नेपोलियन ने उस सैनिक को अपने ही विचारों में डूबा और थका हुआ सा देखा, तो उससे पूछा कि, “तुम जानते हो, इस थैले मे क्या है?”

उस सैनिक ने कहा कि “हुज़ूर, मुझे नहीं पता कि मैं क्या ले जा रहा हूँ।”

नेपोलियन ने उसे थैला खोलकर देखने को कहा।

उस सैनिक ने देखा कि उसका थैला तो सोने और लूटे हुए खजाने के मूल्यवान गहनों से भरा हुआ है।

नेपोलियन ने कहा कि, “आज से यह सब तुम्हारा है, ले लो।”

कुछ ही क्षण पहले वह इतना भारी थैला ले कर चलने के लिए स्वयं को कोस रहा था, लेकिन जब उसे मालूम चला कि उस थैले में सोना और मूल्यवान गहने हैं जो कि अब उसके हैँ, तो उसका रवैया(मनोभाव) तुरंत ही बदल गया, उसके शरीर के हर हिस्से में खुशी फैल गई और ऐसा लग रहा था कि एकदम से उसके अंदर बहुत सारी ताकत और फुर्ती आ गई हो। अब उस सैनिक को अपने घर पहुँचने की बहुत ही जल्दी थी। उसकी सारी थकान दूर हो गई थी। वह इतनी तेजी से भाग रहा था कि हम उसकी कल्पना भी नहीं कर सकते हैं।

किस तरह से हमारा सकारात्मक रवैया हमारे अंदर जीवन के प्रति असीम ऊर्जा भर सकता है और अगर यही रवैया नकारात्मक हो तो हमारे जीवन को कितना उदासीन बना देता है। हमारा रवैया (attitude) केवल हमारे सांसारिक जीवन को ही प्रभावित नहीं करता है बल्कि हमारे आध्यात्मिक जीवन को भी प्रभावित करता है I

शिक्षा के विषय में भी हमने देखा है कि पढ़ाई के प्रति उत्साही बच्चे और वह बच्चे जिनको पढ़ाई में कोई उत्साह नहीं है, उन दोनों तरह के बच्चों का अपने अध्ययन के प्रति रवैये में कितना अन्तर होता है।

एक सही रवैया (attitude) विकसित करने से हमें संसार को सही नज़रिए से देखने में बहुत मदद मिलती है। यदि हम कृत्रिम रूप से मुस्कराते हैं और किसी भी कार्य के प्रति अपनी कृत्रिम खुशी जाहिर करते हैं तो धीरे-धीरे ये कृत्रिम खुशी भी हमारी स्वाभाविक खुशी में बदल जाएगी। हमारा उत्साह और खुशी एक तेज हवा के बहाव जैसे फैल जाएगी। हमारी सकारात्मक सोच से हर कोई प्रभावित होगा।

जीवन हमारे नजरिए की अभिव्यक्ति है।

“इंसान के मन की संतुलित दशा उसके द्वारा विभिन्न परिस्थितियों में की गई सारी गतिविधियों में उसके सही मनोभाव की अभिव्यक्ति है। एक व्यापक अर्थ में, यह उसके चरित्र का प्रतिबिम्ब है।”
लालाजी

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