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क्या हमारा जीवन सच मे जटिल था या हमारी सोच ने उसे जटिल बना दिया?

क्या हमारा जीवन सच मे जटिल था या हमारी सोच ने उसे जटिल बना दिया?

क्या हमारा जीवन सच मे जटिल था या हमारी सोच ने उसे जटिल बना दिया?

मेन्सा

कुछ साल पहले, सैन फ़्रांसिस्को में मेन्सा सम्मेलन हुआ था।

मेन्सा, 140 या उससे अधिक के आईक्यू वाले लोगों के लिए एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है।

सम्मेलन के दौरान कई सदस्य एक स्थानीय कैफे में दोपहर के भोजन के लिए गए।

जब वे वहाँ बैठे हुए थे तो उनमें से एक सदस्य ने देखा कि वहाँ पर रखे हुए नमक दानी में काली मिर्च भरी हुई है और काली मिर्च दानी में नमक भरा हुआ है।

अब सभी सदस्य इस बात पर चर्चा करने लगे कि केवल हाथों का उपयोग करते हुए दो शीशियों की सामग्री को बिना गिराए कैसे बदला जा सकता हैं?

स्पष्ट रूप से- यहाँ मेन्सा के सदस्यों के लिए अपने दिमाग को इस्तेमाल करने का अवसर मिल गया था।

समूह के सदस्यों ने इस समस्या पर आपस में विचार विमर्श किया और अपने अपने विचार प्रस्तुत किए और अंत में, एक नैपकिन, एक स्ट्रॉ, एक खाली तश्तरी को शामिल करते हुए एक शानदार समाधान निकाला।

फिर उन्होंने वेट्रेस को बुलाया, जिसको वे सभी सदस्य अपने समाधान से चकाचौंध करने के लिए तैयार थे।

“मैम,” उन्होंने कहा, “हम आपकी मदद नहीं कर सके लेकिन हमने ये नोटिस किया कि काली मिर्च दानी में नमक है और नमक दानी में काली मिर्च भरी हुई है…।”

लेकिन इससे पहले कि वे अपनी बात खत्म कर पाते, वेट्रेस ने बीच में रोका और कहा…”उसके लिए माफ़ कीजिये।”

वह मेज पर झुक गई, दोनों बोतलों के ढक्कन जिन पर नमक और काली मिर्च लिखा हुआ था, खोल दिए और उनके ढक्कनों को बदल दिया।

मेन्सा टेबल पर सन्नाटा छा गया ।

हमारे जीवन में अधिकांश समस्याओं के लिए सरल समाधान होते हैं, लेकिन यह हमारा “शानदार” दिमाग है, जो हर सरल समाधान को जटिल बनाता है। ढक्कन बदलें और जीवन का आनंद लें !!

जीवन पर एक बार फिर से नज़र डालें, हम पाएँगे कि ज्यादातर मुद्दे गैर-मुद्दे हैं!

“अधिकतर समस्याओं की जड़ यह है कि हम दिल की नहीं सुनते।”
दाजी

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