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आज का सच*

आज का सच*
कहानी पढ़ने से पहले अपनी आँखें धीरे से बंद करें… और अपने दिल में सभी के लिए गहन प्रेम महसूस करें… अब अपने चेहरे पर मुस्कान के साथ धीरे-धीरे अपनी आँखें खोलें… और कहानी पढ़ना शुरू करें….

आज का सच

मैं बेघर होने वाला था….29 नवंबर 2018 को सिर्फ इसलिए कि मैं मकान का किराया नहीं दे पा रहा था।

मैंने फेसबुक पर मदद के लिए पोस्ट किया, लेकिन मुझे केवल 2 लाइक और शून्य कमेंट मिले।

फिर मैंने अपनी संपर्क सूची में $1500 के ऋण के लिए अनुरोध करते हुए 250 संदेश भेजे।

दुख की बात रही कि केवल 10 लोगों ने उत्तर दिया। 10 में से 6 ने मदद नहीं कर सकने में अपनी मजबूरी बताई। 4 में से केवल 1 ने कहा कि वो मेरी मदद कर सकता है और वास्तव में उसने मुझे कुछ पैसे भी दिए लेकिन बाकी ने केवल बहाना बनाया और मेरी कॉल तक नहीं उठाई।

अंततः, मेरा घर का दरवाजा मेरे लिए बंद कर दिया गया। मेरे पास सोने तक के लिए कोई जगह नहीं बची।

मैं बहुत परेशान था और कुछ समाधान के बारे में सोचते हुए अंधेरे में एक रास्ते से गुज़र रहा था। उस्सी पल एक चोर ने मेरा खाली पर्स चुरा लिया, जिसमें केवल मेरा पहचान पत्र था।

भागते वक्त उस चोर को एक तेज रफ्तार कार ने बुरी तरह टक्कर मार दी, जिससे उसकी मौत हो गई।

इसके आगे का घटनाक्रम>>
अगले दिन, खबर तेजी से चारों ओर फैल गई कि मेरी मृत्यु हो गई है क्योकि उस चोर के पास मेरा पहचान पत्र था।

करीब 2500 लोगों ने मेरी सोशल मीडिया वॉल पर पोस्ट कर दिया कि वे मुझे कैसे जानते हैं! मैं कितना महान था!

मेरे वफादार दोस्तों द्वारा एक समिति का गठन किया गया,जिससे मेरे अंतिम संस्कार में मेहमानों के सत्कार के लिए $18000 का योगदान दिया गया।

मेरे सहयोगियों ने मिलकर एक ताबूत, तंबू और कुर्सियों के लिए $4500 दिए।

मुझे 1500 डॉलर के ताबूत में दफनाया जाना था- उतनी ही राशि जो मुझे किराए के लिए चाहिए थी।

रिश्तेदार भी मिलने आने वाले थे। उनके लिए मिलने का यह एक दुर्लभ अवसर था, इसलिए इस अवसर के लिए उन्होंने $3000 का योगदान दिया।

हर कोई इस अवसर पर सेवा करना चाहता था ताकि वे ये दिखा सके कि वे मेरे हमदर्द हैं।

उन्होंने मेरी तस्वीर वाली टी-शर्ट छपवाईं। प्रत्येक टी-शर्ट की कीमत $250 थी, इसलिए टी-शर्ट वाले ने मेरी तथाकथित मृत्यु से लगभग 25000 डॉलर कमाए।

हर कोई मेरे अंतिम संस्कार में मंच पर खड़े रहकर बोलना चाहता था। हर तरफ उन लोगों का ड्रामा था जो जानते ही नहीं थे कि मैं बच गया हूँ।

ऐसी भी अफवाह थी कि मेरे दोस्तों ने मेरी हत्या कर दी। मैं कितना प्रतिभाशाली था, इस पर वहाँ भाषण दिए गए, यहाँ तक ​​कि उन लोगों द्वारा भी जो कभी भी मेरे कार्यक्रमों में शामिल तक नहीं हुए थे।

जिन चंद दोस्तों ने मेरा साथ दिया था, उन्हें मेरे अंतिम संस्कार की बैठक के दौरान बोलने तक का मौका भी नहीं मिला – हालाँकि वे सच्चाई जानते थे।

वास्तव में, वे ही मेरी ‘मौत’ के प्रमुख संदिग्ध थे।

आप कल्पना कर सकते हैं कि वहाँ मुझे जीवित देखने के बाद दृश्य कैसे बदल गया होगा!

मुझे देखकर हर कोई हैरान रह गया, कुछ लोगों ने तो सोचा कि मैं भूत हूँ। लेकिन अजीब बात यह थी, कि ऐसा लगा जैसे केवल कुछ मुट्ठी भर लोग ही मुझे जीवित देखकर खुश थे। ऐसा लग रहा था कि लोग निराश हैं कि उन्होंने इतना कुछ किया है और उसका कुछ मतलब नहीं रहा..यह उनके लिए केवल एक हास्यास्पद घटना थी।

यह जीवन की विडंबना है; हम ज़िंदा से ज़्यादा मरे हुओं से प्यार करते हैं।

यह है आज की दुनिया का परम सत्य…..

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“प्यार में अपेक्षा का कोई स्थान नहीं होता, केवल कृतज्ञता का स्थान होता है। इसलिए प्रेम मानव कुलीनता का शिखर है।”
दाजी

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