शनि अमावस्या कल करें उपाय होगा लाभ
हमारे धर्म शास्त्रों में शनि अमावस्या का महत्व प्रतिपादित किया गया है।इसे शनैश्चरी अमावस्या अथवा शनिचरी अमावस के नाम से भी जाना जाता है।
शनि अमावस्या के दिन दान,स्नान और पूजा-पाठ एवं पितरों का श्राद्ध आदि करने से जीवन में आने वाले कष्टों से छुटकारा पाया जा सकता है।
आचार्य धीरज द्विवेदी “याज्ञिक” जी ने बताया कि जिनके ऊपर शनि की साढ़ेसाती,ढैय्या,चल रही हो अथवा शनि की महादशा, अंतर्दशा,चल रही हो या जिनकी कुंडली में शनि प्रतिकूल हो ऐसे राशि वालों को भी इस दिन कुछ खास उपाय करने से लाभ मिलता है।
उपाय –
1- हनुमान चालीसा का पाठ करें- शनैश्चरी अमावस्या के दिन हनुमान चालीसा का पाठ करना बहुत लाभकारी होता है। ऐसा करने से आर्थिक,शारीरिक और मानसिक परेशानियों से छुटकारा मिलता है।
2 – इस दिन लोहे के पात्र में सरसों के तेल में अपनी परछाई देखकर दान करने से शनि,राहु,केतु जनित ग्रह बाधा से शांति मिलती है।
3- काले घोड़े की नाल अपने घर के दरवाजे पर लगाने से ऊपरी बाधाओं से रक्षा वास्तु दोष निवारण एवं शनि ग्रह के दोष से लाभ मिलता है।
4 – इस दिन काले कुत्ते को रोटी खिलाने से लाभ होता है।
5 – सायं काल पश्चिम की ओर बत्ती कर काला तिल डालकर तेल का दीपक जलाकर ऊं शं शनैश्चराय नमः का जाप करें।
6- शनैश्चरी अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष की पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है। पीपल पर जल चढ़ाएं एवं पीपल वृक्ष की विधिवत पूजा कर परिक्रमा करें तथा सायं काल पीपल वृक्ष के पास दीपदान करने से लाभ होता है धर्म शास्त्रों के अनुसार पीपल के पेड़ में भगवान विष्णु सहित कई देवी-देवता और पितरों का वास होता है। अमावस्या के दिन पीपल की पूजा करके आप उनकी कृपा प्राप्त कर सकते हैं। पीपल की परिक्रमा करना भी शुभ माना जाता है।
7- शनिदेव की पीड़ा को शांत करने के लिए शनिवार के दिन पीपल का वृक्ष लगाने का विधान है। इस दिन पीपल का वृक्ष लगाने से शनि ग्रह के प्रभावों से शांति मिलती है एवं पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
8 – शनि ग्रह से पीड़ित व्यक्ति को प्रत्येक शनिवार को तैलाभ्यंग स्नान करना चाहिए ऐसा करने से शनि ग्रह जनित बाधा से शांति मिलती है।
शनि जिन राशियो में कारक होते हैं उन लोगों को साढे साती में बड़े स्तर पर लाभ भी प्रदान करते हैं। प्रायः वृष,तुला,मकर,कुम्भ राशि वालों के लिए इनकी साढेसाती शुभ फलदायक होती है परन्तु वह भी व्यक्ति के कर्म के आधार पर ही शुभ या अशुभ फल कम या अधिक मात्रा में प्राप्त होता है। इस प्रकार कर्म फल प्रदायक शनि देव अच्छे कर्म करने वाले को पुरस्कृत एवं गलत कार्य करने वाले को दण्डित करने से भी नही चूकते हैं।
समस्त सनातन धर्मावलंबियों को शनि अमावस्या की अनंतानंत बधाई एवं शुभकामनाएं।
।।सबका मंगल हो।।
आचार्य धीरज द्विवेदी “याज्ञिक”
(ज्योतिष वास्तु धर्मशास्त्र एवं वैदिक अनुष्ठानों के विशेषज्ञ)
संपर्क सूत्र – 09956629515
08318757871












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