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*पढ़ने से पहले… धीरे से अपनी आंखें बंद करे… मुस्कुराएं और इस आजादी के वातावरण में एक गहरी सांस लें… महसूस करें इस आजादी को… *


*पढ़ने से पहले… धीरे से अपनी आंखें बंद करे… मुस्कुराएं और इस आजादी के वातावरण में एक गहरी सांस लें… महसूस करें इस आजादी को… *

रूस में शादी

सुधा नारायण मूर्ति,अपना अनुभव बाँटते हुए लिखती हैं-

हाल ही में मैं मास्को, रूस में थी। वहाँ पर एक दिन मैं पार्क में गयी, उस दिन रविवार था।

वहाँ गर्मी का मौसम था, परंतु उस दिन बूंदा बांदी और ठंड थी। मैं एक छतरी के नीचे खड़ी थी और उस जगह की सुंदरता का आनंद ले रही थी। तभी अचानक, मेरी नज़र एक युवा जोड़े पर पड़ी।

उनको देख के यह स्पष्ट लग रहा था कि उन्होंने अभी-अभी शादी की है। वह लड़की करीबन बीस साल की लग रही थी। वह अपने बहुत ही सुंदर घने बाल, अपनी चमकीली नीली आँखों और अपनी सुडोल और पतले शरीर की वजह से बहुत सुंदर दिख रही थी।

लड़का भी दिखने में लगभग उसी की ही उम्र का लग रहा था और वह बहुत सुंदर सैन्य वर्दी में था।

वह लड़की सुंदर सफेद साटन का गाउन पहने हुई थी, जिसे मोतियों और सुंदर लेस से सजाया गया था। शादी के गाउन के हेम को पकड़े हुए उसके पीछे दो युवा खड़े थे, ताकि वह गंदा न हो जाए।

वह लड़का अपने सिर पर छाता लिए हुए था, ताकि वे भीग न जाएँ। और लड़की एक गुलदस्ता पकड़े हुए थी और दोनों अपनी बाहों को जोड़े हुए खड़े थे। वह नजारा बहुत ही सुंदर था।

मुझे उनको देखकर बहुत ही आश्चर्य हुआ कि वे शादी के तुरंत बाद इस बारिश में यहाँ इस पार्क में क्यों आए थे? वह चाहते तो एक खुशहाल जगह पर जा सकते थे, मैंने देखा कि वह स्मारक के पास उठे हुए मंच पर एक साथ चल रहे थे और उन्होंने गुलदस्ता रखा, मौन में अपना सिर झुकाया और धीरे-धीरे वापस चले गए।

बहुत देर से मैं इस नजारे का आनंद उठा रही थी। परंतु मेरे मन में उसके साथ ही यह जानने की उत्सुकता थी कि क्या हो रहा है?

मेरी नजर एक बुजुर्ग आदमी पर पड़ी ,जो उस नवविवाहित जोड़े के साथ खड़े थे। उन बुजुर्ग आदमी की नजर मेरी साड़ी पर पड़ते ही, वह पूछ उठे,”क्या आप एक भारतीय है?” मैंने बड़े प्यार से उत्तर दिया, “हाँ मैं एक भारतीय हूँ।” इस तरह हमारे बीच बहुत ही सौहार्दपूर्ण ढंग से बातचीत होने लगी। इस बीच, मैं कुछ प्रश्न पूछने का इंतजार कर रही थी, इसलिए मैंने पूछ ही लिया, “कृपया मुझे बताएँ कि वह युवा जोड़ा अपनी शादी के दिन युद्ध स्मारक क्यों गया था?”

यह सुनकर वह बोले कि, “यह रूस का रिवाज है,और यहाँ पर शादी अक्सर शनिवार या रविवार को ही होती है।”

आगे बताते हुए वह कहने लगे,
“मौसम की परवाह किए बिना, यहाँ पर हर विवाह कार्यालय में रजिस्टर पर हस्ताक्षर करने के बाद, विवाहित जोड़ों को आसपास के महत्वपूर्ण राष्ट्रीय स्मारकों का दौरा करना पड़ता है।”

“इस देश के हर लड़के को सेना में कम से कम दो साल तक सेवा करनी होती है और उसे शादी के लिए अपनी सेवा वर्दी पहननी होती है।”

यह सब सुनकर बड़े ही आश्चर्य के साथ मैंने उनसे पूछा, “यहाँ ऐसा रिवाज क्यों है?”

यह सुनते ही वह बोल उठे कि,
“यह कृतज्ञता का प्रतीक है। और हमारे पूर्वजों ने रूस द्वारा लड़े गए विभिन्न युद्धों में अपना जीवन दिया है। उनमें से कुछ जीते,तो कुछ हारे, लेकिन उनका बलिदान हमेशा देश के लिए था। इसीलिए हर नवविवाहित जोड़े को याद रखना चाहिए कि वे अपने पूर्वजों के बलिदान के कारण एक शांतिपूर्ण, स्वतंत्र रूस में रह रहे हैं। इसीलिए उन्हें उनका आशीर्वाद माँगना ही चाहिए।”

“हम बुजुर्ग यह मानते हैं कि देश के लिए प्यार, किसी भी शादी समारोहों से ज्यादा महत्वपूर्ण है। इसीलिए हम इस परंपरा को जारी रखने पर जोर देते हैं, चाहे वह मॉस्को, सेंट पीटर्सबर्ग या रूस के किसी अन्य हिस्से में हो। इस वजह से शादी के दिन उन्हें निकटतम युद्ध स्मारक जाना होता है।”

वहाँ पर उन बुजुर्ग व्यक्ति से बातचीत करने के बाद मेरी अंतरात्मा में बार-बार एक ही बात चल रही थी कि हम यहाँ अपने बच्चों को क्या पढ़ाते हैं। क्या हम सभी के पास अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण दिन पर अपने शहीदों को जिन्होंने अपना जीवन देकर हमको आज़ादी का वातावरण दिया, उनको याद करने का शिष्टाचार है?

शायद हम इस बात पर कभी विचार भी नहीं करते।

इस सारे वाक्या के दौरान मेरी आँखें आँसुओं से भर गईं.. मैं भी चाहती थी कि हम इस महान विचार और रीति-रिवाज में रूसियों से एक सबक सीख सकें।

हम भी अपने उन शहीदों का सम्मान कर सके जिन्होंने अपने देश के लिए और हमारे आज और कल के लिए, अपने प्राणों की आहुति दे दी…!

“जब कोई नेक काम किया जाए तो उससे मिलने वाली ख़ुशी औरों में बाँटें। तब चेतना अबाध रूप से बढ़ेगी।
दाजी

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