अमेठी के गौरीगंज से MLA राकेश प्रताप सिंह शुक्रवार से करेंगे अन्न जल त्याग, सरकार पर लगाया आरोप
Uttar Pradesh News: सड़क निर्माण का काम रुका होने से नाराज विधायक राकेश प्रताप सिंह ने आमरण अनशन का एलान किया है। आरोप है कि चार दिन से अनशन पर बैठे विधायक की सुध किसी ने नहीं ली।
अमेठी के गौरीगंज से विधायक राकेश प्रताप सिंह (MLA Rakesh Pratap Singh) कल अन्न जल का त्याग करेंगे। राकेश सिंह चार दिन से हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा के सामने अनशन पर बैठे हुए हैं। लेकिन कोई सुनवाई न होने पर उन्होंने अब अन्न जल त्याग कर आमरण अनशन का फैसला लिया है।
अनशन पर बैठे विधायक की किसी ने नहीं ली सुध
विधायक राकेश सिंह का कहना है की उनके क्षेत्र की दो महत्वपूर्ण सड़कों के पुनर्निर्माण का काम पिछले तीन साल से रुका हुआ है।कई बार शिकायत के बाद भी काम पूरा नहीं हुआ। इस साल फरवरी में उन्होंने विधानसभा सत्र के दौरान मुद्दा उठाया था।उस वक्त सरकार ने 3 महीने से कम समय में सड़कें बन जाने का वादा किया। लेकिन अब तक मौके पर एक गिट्टी तक नहीं गिरी। इसके विरोध में राकेश सिंह ने 31 अक्टूबर को विधानसभा सदस्य के पद से इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष को भेज खुद धरने पर बैठ गए।उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी सरकार को गुमराह कर रहे हैं 4 दिन से अनशन पर बैठने के बावजूद किसी अधिकारी या सरकारी प्रतिनिधि ने संपर्क तक नहीं किया।
राकेश सिंह के धरने को सपा का मिला समर्थन
दूसरी तरफ, राकेश सिंह के धरने को सपा का समर्थन मिल गया है। मौके पर पहुंचे पार्टी के मुख्य प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने कहा कि अगर बीजेपी सरकार अनसुना करेगी तो सपा सरकार बनते ही 2022 में तमाम मांगे पूरी की जाएंगी। उन्होंने लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ एक्शन लेने की भी बात कही। उन्होंने वादा किया कि सपा सरकार में जनप्रतिनिधियों का सम्मान होगा, जनता की मांग पर सपा काम करेगी। लखीमपुर में पीड़ित परिवारों को अब तक न्याय नहीं मिलने के सवाल पर राजेन्द्र चौधरी ने कहा कि लखीमपुर मृतकों की याद में स्मृति दिवस के तौर पर एक दिया सब कार्यकर्ता जलाएंगे।
उन्होंने पार्टी की तरफ से राकेश सिंह को समर्थन करने का भरोसा दिलाया। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव के स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए कामों को बीजेपी ने ध्वस्त किया।वहीं, सपा प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल ने लोगों का बीजेपी के प्रति आक्रोश होने की बात कही। उन्होंने कहा की किसान हताश और निराश हैं।सरकार खुद सदन में कही बात का संज्ञान नहीं ले रही।











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