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जीवामृत में कौन-कौन से पौषक तत्व और जीवाणु हैं?

जीवामृत में कौन-कौन से पौषक तत्व और जीवाणु हैं?

जीवामृत क्या है? कैसे बनाएं? कैसे उपयोग करें? जीवामृत का जमीन के स्वास्थ्य और फसल पर क्या प्रभाव होता है?

खेती मे अंधाधुन रसायनिक उर्वरको और कीटनाशकों के भारी मात्रा मे प्रयोग होने के कारण हमारी भूमि की संरचना बदल गई है। भूमि की उपजाऊ क्षमता घटने के साथ भूमि बंजर होती जा रही है।

पौधे का स्वास्थ्य और फसल की पैदावार भूमि के स्वास्थ्य के ऊपर सीधा निर्भर करता है।

कृषि क्षेत्र में रसायन के प्रयोग से हमारे पर्यावरण पर जो दुष्प्रभाव पड़ा है, इसे मूल रूप से सुधारने के लिए तथा भूमि को अधिक उपजाऊ बनाने के लिए जैविक खेती में पंचगव्य, जीवामृत, बीजामृत, ब्रह्मास्त्र, दशपर्णी अर्क, वेस्ट डिकॉम्पोज़र जैसे जैव उर्बरक, कीटनाशक और वृद्धि नियंत्रक का प्रयोग किया जाता है।

जीवामृत क्या है?

जीवामृत दो शब्दों का मेल है – जीवन + अमृत = जीवामृत, अर्थात जीवन के लिए अमृत के समान। यह गाय से प्राप्त गोबर, गोमूत्र के साथ गुड़, बेसन, और जीवाणुयुक्त मिट्टी के मिश्रण से तैयार किया जाता है, जो न केवल हमारे फसल के लिए बल्कि पूरे जीव जगत के स्वास्थ्य दृष्टिकोण से अमृत के समान है।

जीवामृत एक प्रभावशाली जैव उर्वरक, पौध वृद्धि नियंत्रक तथा विकास हर्मोन है, जो फसल के सभी चरणों में विकास और पैदावार बढ़ाने में मदद करता है।

यह सूक्ष्मजीवों की संख्या को बढ़ाता है और इन्हें एक अनुकूल वातावरण प्रदान करता है जो पौधों को आवश्यक स्थूल पोषक तत्व(नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश) और सूक्ष्म पोषक तत्व प्रदान करता है।

यह मिट्टी में केंचुओं की संख्या को बढ़ाता है जिससे भूमि हमेशा उपजाऊ बनी रहती है।

जैविक खेती में जीवामृत का महत्व –

यह प्राकृतिक कार्बन, नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटेशियम और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों का एक उत्कृष्ट स्रोत है जो मुख्य रूप से जैविक खेती में प्राकृतिक खाद के रूप में उपयोग किया जाता है।

इसका पीएच मान 4.8 से 4.9 के बीच होता है यानी ये अम्लीय है। क्षारिय मिट्टी के पी एच मान को सुधारने के लिए मदद करता है।

जीवामृत में पोषक तत्व और सूक्ष्म जीवों की मात्रा-

No. पोषकतत्व और सूक्ष्म जीव मात्रा PPM

  1. पी एच: (PH) 7.07
  2. नाइट्रोजन 770
  3. फॉस्फोरस 166
  4. पोटाश 126
  5. कॉपर 1.6
  6. आयरन 290
  7. जिंक 4.3
  8. मैंगनीज 10.7
  9. कवक 13.8*103
  10. बैक्टीरिया 20.4*105
    कम्पोस्ट और वर्मीकम्पोस्ट जैसे जैविक खाद के अन्य रूपों की तुलना में जीवामृत बहुत आसानी से और जल्दी से तैयार किया जा सकता है।

फसल में जीवामृत प्रयोग करने का तरीका भी बहुत आसान है। जमीन की जुताई के समय, खेत मे पानी लगाते समय, ड्रिप सिंचाई के माध्यम से, स्प्रिंकलर के द्वारा, ड्रेंचिंग पद्धति से या खड़ी फसल में छिड़काव करके प्रयोग किया जा सकता है।

इसे सभी तरह के फसलों(धान, गेहूं, मक्का, बाजरा, ज्वार इत्यादि), सब्जियों(टमाटर, मिर्च, भिंडी, करेला, लौकी, कद्दू, खीरा, मूली, गाजर, प्याज, लहसिआलू इत्यादि), दलहनी फसल, तिलहनी फसल तथा फलदार पौधे(केला, संतरा, अनार, मौसंबी, नारियल, पपीता, अमरूद इत्यादि) पर प्रयोग किया जा सकता है। इसका फसलों पर कोई नुकसान नही होता है।

जीवामृत बनाने की विधि –

कृषि में जीवामृत प्रयोग करने की सुविधा के दृष्टिकोण से इसे 3 प्रकार से आप प्रस्तुत कर सकते है।

  1. जीवामृत की तरल अवस्था (Liquid Jeevamrut)
  2. जीवामृत की अर्द्ध ठोस अवस्था –
  3. सूखा जीवामृत/घन जीवामृत –

जीवामृत बनाते समय कुछ बातों का अवश्य ध्यान रखें-

इसे बनाने के लिए केवल देशी गाय के गोबर और गोमूत्र का प्रयोग करें।

एक छायादार स्थान का चयन करें जहां पर सीधे रूप से सूर्य की किरणें न गिरती हों।

जिस पात्र में इसे प्रस्तुत कर रहे हैं, उसका मुंह या ढक्कन खुला रखें ताकि जीवामृत मिश्रण के अंदर ऑक्सीजन का आवागमन हो सके।

लेकिन ध्यान रखें पात्र के मुंह को किसी जालीदार कपड़े या टाट के बोरे से ढंक ले, जिससे मक्खी, मच्छर या किट पतंग मिश्रण के अंदर अंडे ना दे सके।

तरल जीवामृत बनाने की विधि –

एक एकड़ फसल में प्रयोग करने हेतु जीवामृत बनाने के लिए आवश्यक सामग्री-

5 से 10 किलो देशी गाय का गोबर

5 से 10 लीटर गौमूत्र

1से 2 किलो गुड़ ( पुराना गुड़ ज्यादा असरदार होता है।)

1 किलो बेसन (मूंग, उडद, अरहर, चना, किसी भी दलहन का आटा ले सकते हैं)

सजीव मिट्टी – एक मुठ्ठी पीपल या बरगद के पेड़ के नीचे की मिट्टी अथवा खेत की मेढ़ की मिट्टी, क्योंकि इसमें सूक्ष्म जीवों की संख्या ज्यादा होती है।

200 लीटर पानी

ऊपर बताए गए पांच सामग्रियों, गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन, और सजीव मिट्टी को उनके मात्रा के अनुसार एक ड्रम में 200 लीटर पानी में मिलाएं और इसे 5 से 10 मिनट तक हिलाएं ताकि सभी सामग्री पानी में अच्छे तरीके से घुल जाए।

अब इस मिश्रण को किसी पेड़ के नीचे या छायादार जगह पर रख दीजिए।

लगभग 48 घंटे के बाद इसमें fermentation का प्रक्रिया शुरू हो जाती है जिससे सूक्ष्म जीवों के संख्या में बढ़वार होने लगती है।
प्रतिदिन सुबह और शाम दिन में दो बार मिश्रण को डंडे के सहारे हिलाएं।
चौबीस घंटे बाद तरल जीवामृत पूरी तरह से तैयार हो जाता है खेत में प्रयोग करने के लिए। इसे एक सप्ताह के भीतर उपयोग कर लेवें।

तरल जीवामृत को प्रयोग करने की विधि –

तरल जीवामृत को फसल में कई प्रकार से प्रयोग किया जा सकता है।

  1. खेत की जुताई करते समय जीवामृत को मिट्टी पर छिड़काव करके मिला सकते हैं।
  2. फसल में सिंचाई करते समय पानी के साथ मिलाकर, ड्रिप सिंचाई से या फव्वारे के सहारे प्रयोग करें। इस प्रकार जीवामृत एक महीने के अंतराल पर हम फसलों को दे सकते हैं।
  3. पंद्रह से बीस लिटर तरल जीवामृत को दो सौ लिटर पानी में मिलाकर खड़ी फसल पर छिड़काव कर सकते हैं।
  4. फलदार पेड़ों के लिए 4-5 लीटर जीवामृत प्रति पौधे के हिसाब से पौधों की जड़ों में दे सकते हैं।

फसल को दी जाने वाली प्रत्येक सिंचाई के साथ 200 लीटर जीवामृत का प्रयोग प्रति एकड़ की दर से उपयोग किया जा सकता है।

इसे सभी तरह के फसलों(धान, गेहूं, मक्का, बाजरा, ज्वार इत्यादि), सब्जियों(टमाटर, मिर्च, भिंडी, करेला, लौकी, कद्दू, खीरा, मूली, गाजर, प्याज, लहसुन आलू इत्यादि), दलहनी फसल, तिलहनी फसल तथा फलदार पौधे(केला, संतरा, अनार, मौसंबी, नारियल, पपीता, अमरूद इत्यादि) सभी तरह की फसलों में इसका प्रयोग किया जा सकता है। इसका फसलों पर कोई नुकसान नही होता है।

अर्द्ध ठोस जीवामृत बनाने की बिधि (Semi Solid Jeevamrut Making Process)

अर्द्ध ठोस जीवामृत बनाने के लिए आवश्यक सामग्री-

  1. गोबर = 100 किलोग्राम
  2. गौमूत्र = 5 लीटर
  3. गुड़ = 2 किलोग्राम
  4. बेसन = 2 किलोग्राम
  5. सजीव मिट्टी = 1 किलोग्राम

इन सभी सामग्री को एक साथ मिलाकर अच्छे से गुंथे जिससे कि इनके छोटे छोटे गोले बनाया जा सके।

गोले बनाकर इन्हें छायादार जगह पर सुखाएं।

अर्द्ध ठोस जीवामृत गोले को पर्याप्त नमी मिलते ही इसमें स्थित सूक्ष्म जीव एक्टिव हो जाते हैं।

इसे फलदार पेड़ या खड़ी फसल में मिट्टी के नीचे 3-4 इंच गहराई पर रख दीजिए। खेत मे सिंचाई करते समय यह पानी में मिलकर अपने आप फसलों की जड़ों तक पहुंच जाएगा।

घन जीवामृत बनाने की विधि –

अर्द्ध ठोस जीवामृत की सूखी हुई पाउडर अवस्था को ही घन जीवामृत कहते हैं।

100 किलोग्राम गोबर, 5 लीटर गौमूत्र, 2 किलोग्राम गुड़, 2 किलोग्राम बेसन, 1 किलोग्राम सजीव मिट्टी को एक पात्र में लेकर अच्छे से मिलाएं और छाँव में अच्छी तरह फैलाकर सुखा लें। सूखने के बाद इसको कूट कर पाउडर बना लीजिए।

इस प्रकार बने घन जीवामृत को हम 6 महीने तक भंडारण करके रख सकते हैं।

घन जीवामृत को मुख्य रूप से खेत की जुताई के समय प्रयोग किया जाता है।

खेत जुताई के समय या किसी भी फसल की बुवाई के समय प्रति एकड़ 100 किलो घन जीवामृत को गोबर खाद या अन्य जैविक खाद के साथ मिलाकर प्रयोग कर सकते हैं।

जीवामृत के प्रयोग से भूमि पर क्या असर पड़ता है?

जीवामृत के लगातार प्रयोग करने से भूमि में केचुओं की संख्या में बढ़ोत्तरी होती है। केंचुए मिट्टी को भुरभुरा बनाते है तथा पौधों की जड़ों को ऑक्सीजन दिलाने में अहम भूमिका निभाते हैं। केंचुए जमीन की गहराई में जाकर मिट्टी खाते हैं और जमीन की सतह पर आकर मल त्याग करते हैं। इस तरह से ये जमीन को पोला करते हैं जिससे जमीन की जलधारण क्षमता बढ़ती है और इनके मल में शूक्ष्म पौषक तत्व होते हैं जो फसल के उत्पादन में सहयोगी होते हैं।

जीवामृत पौधों को मिट्टी से पोषक तत्वों को आसानी से अवशोषित करने में मदद करता है।

जीवामृत के प्रयोग से भूमि की उर्वरा शक्ति मे वृद्धि होती है।

भूमि में फसल सहयोगी सूक्ष्म जीव, जीवाणु व बैक्टीरिया इत्यादि में वृद्धि होती है जो पौधों को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करने में मदद करते हैं।

भूमि के अंदर पोषक तत्व जटिल अवस्था में होते है जिन्हें पौधे ग्रहण नही कर सकते। इन जटिल पोषक तत्वों को विघटन करके पौधों की जड़ों को दिलाने का काम सूक्ष्म जीव करते हैं। अर्थात जीवामृत भूमि की उपजाऊ शक्ति को बनाये रखता है।

खेती में जीवामृत प्रयोग करने के फायदे –

बीज की अंकुरण क्षमता में वृद्धि होती है |

पौधे की पत्तियां आकार में बड़ी होती हैं तथा पौधा हमेशा हराभरा रहता है।

पौधे में नई शाखाओं का विकास होता है जिससे अपेक्षाकृत ज्यादा फूल और फल प्राप्ति की संभाबना रहती है।

पौधे की जड़ें घनी और लंबी होती है जिससे पौधे को अपेक्षाकृत अधिक पोषकतत्व प्राप्त होता है।

फसलों में रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।

फसलों पर इसके प्रयोग से पैदावार में 15 से 20 प्रतिशत वृद्धि होती है।

जीवामृत के प्रयोग से उगे अनाज, फल,सब्जी खाने में अधिक स्वादिष्ट और जहरमुक्त होती है।🙏

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