।। प्रार्थना ।।
हे कन्हैया कन्हैया कन्हैया सुनो-
तेरा “भारत है आरत” हमारी सुनो।
तुम बचाने धरम को आओगे कब,
अब बढ़े हैं असुर तुम आकर हनो।
तेरी संतति भूली है मार्ग तेरा,
हर गली में सपोला है विष से भरा।
कुछ कौरव भी हैं उनका साथ लिए,
तुम सुनाओ ना गीता भ्रम को हरो।
आज भीष्म भी मौन है द्रोनभी मोन,
बचाए कृष्णा को तुम बिनु कौन,
तुम बताओ ना अर्जुन को मार्ग वही,
जो करते है छल तुम भी छल को चुनो।।
हे कन्हैया कन्हैया कन्हैया सुनो-
तेरा “भारत है आरत”हमारी सुनो।।
।। सबका मंगल हो ।।
आचार्य धीरज द्विवेदी “याज्ञिक”
।। प्रार्थना ।।












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