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भोपाल : प्रदेश में गहरा सकता है बिजली का संकट, इन पावर प्लांट में बंद हुआ उत्पादन, जानें क्या पड़ेगा असर

भोपाल- प्रदेश में एक बार फिर बड़ा बिजली संकट गहराने लगा है। इसकी वजह है प्रदेश के तीन पावर प्लांट में बिजली का उत्पादन बंद होना। भारी देनदारियों, डैम में कम पानी और कंपनियों को सब्सिडी नहीं देने के चलते इन पावर प्लांट्स में कोयले की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इस कारण एक बार फिर बिजली संकट गहराने लगा है। सरकार फिलहाल निजी क्षेत्र से बिजली खरीदकर सप्लाई कर रही है। बता दें कि प्रदेश के तीन बड़े पावर प्लांट्स में बिजली का उत्पादन रुक गया है। इनमें सारणी पावर प्लांट की 200 मेगा वाट इकाई, 210 मेगा वाट इकाई, सिंगाजी पावर प्लांट के 600 मेगा वाट की इकाई और बिरसिंहपुर पावर प्लांट शामिल हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रदेश के थर्मल पावर प्लांट ज्यादा से ज्यादा 2 दिनों का कोयला बचा है। कंपनी को कोल इंडिया कंपनी की तरफ से कोयले की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इसके चलते प्रदेश में बिजली उत्पादन प्रभावित होने का खतरा मंडरा रहा है। सरकार को प्राइवेट जनरेटर को 1200 सौ करोड़ और कॉल इंडिया को 1000 करोड़ से ज्यादा का भुगतान करना है। इस कारण कोल इंडिया ने कोयले की आपूर्ति में कटौती की है।
फसलों पर पड़ सकता है असर…
बता दें कि बिजली प्रभावित होने के कारण किसानों पर भी इसका काफी असर पड़ सकता है। दरअसल उपभोक्ताओं और किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी के एवज में बिजली कंपनियों को सरकार से पैसे नहीं मिल पा रहे हैं। इस कारण प्राइवेट जनरेटर कोल इंडिया को भुगतान नहीं कर पा रही है। वहीं बिजली की परेशानी के कारण किसानों को भी इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। किसानों के लिए रबी का सीजन आने वाला है। अक्टूबर के महीने में किसानों को भी बिजली की मांग तेज हो जाएगी। प्रदेश में फिलहाल 1 हजार 62 मेगा वाट बिजली की डिमांड है। इस डिमांड की वर्तमान में आपूर्ती पूरी तरह से की जा रही है।

भोपाल- प्रदेश में एक बार फिर बड़ा बिजली संकट गहराने लगा है। इसकी वजह है प्रदेश के तीन पावर प्लांट में बिजली का उत्पादन बंद होना। भारी देनदारियों, डैम में कम पानी और कंपनियों को सब्सिडी नहीं देने के चलते इन पावर प्लांट्स में कोयले की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इस कारण एक बार फिर बिजली संकट गहराने लगा है। सरकार फिलहाल निजी क्षेत्र से बिजली खरीदकर सप्लाई कर रही है। बता दें कि प्रदेश के तीन बड़े पावर प्लांट्स में बिजली का उत्पादन रुक गया है। इनमें सारणी पावर प्लांट की 200 मेगा वाट इकाई, 210 मेगा वाट इकाई, सिंगाजी पावर प्लांट के 600 मेगा वाट की इकाई और बिरसिंहपुर पावर प्लांट शामिल हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रदेश के थर्मल पावर प्लांट ज्यादा से ज्यादा 2 दिनों का कोयला बचा है। कंपनी को कोल इंडिया कंपनी की तरफ से कोयले की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इसके चलते प्रदेश में बिजली उत्पादन प्रभावित होने का खतरा मंडरा रहा है। सरकार को प्राइवेट जनरेटर को 1200 सौ करोड़ और कॉल इंडिया को 1000 करोड़ से ज्यादा का भुगतान करना है। इस कारण कोल इंडिया ने कोयले की आपूर्ति में कटौती की है।
फसलों पर पड़ सकता है असर…
बता दें कि बिजली प्रभावित होने के कारण किसानों पर भी इसका काफी असर पड़ सकता है। दरअसल उपभोक्ताओं और किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी के एवज में बिजली कंपनियों को सरकार से पैसे नहीं मिल पा रहे हैं। इस कारण प्राइवेट जनरेटर कोल इंडिया को भुगतान नहीं कर पा रही है। वहीं बिजली की परेशानी के कारण किसानों को भी इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। किसानों के लिए रबी का सीजन आने वाला है। अक्टूबर के महीने में किसानों को भी बिजली की मांग तेज हो जाएगी। प्रदेश में फिलहाल 1 हजार 62 मेगा वाट बिजली की डिमांड है। इस डिमांड की वर्तमान में आपूर्ती पूरी तरह से की जा रही है।

भोपाल- प्रदेश में एक बार फिर बड़ा बिजली संकट गहराने लगा है। इसकी वजह है प्रदेश के तीन पावर प्लांट में बिजली का उत्पादन बंद होना। भारी देनदारियों, डैम में कम पानी और कंपनियों को सब्सिडी नहीं देने के चलते इन पावर प्लांट्स में कोयले की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इस कारण एक बार फिर बिजली संकट गहराने लगा है। सरकार फिलहाल निजी क्षेत्र से बिजली खरीदकर सप्लाई कर रही है। बता दें कि प्रदेश के तीन बड़े पावर प्लांट्स में बिजली का उत्पादन रुक गया है। इनमें सारणी पावर प्लांट की 200 मेगा वाट इकाई, 210 मेगा वाट इकाई, सिंगाजी पावर प्लांट के 600 मेगा वाट की इकाई और बिरसिंहपुर पावर प्लांट शामिल हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रदेश के थर्मल पावर प्लांट ज्यादा से ज्यादा 2 दिनों का कोयला बचा है। कंपनी को कोल इंडिया कंपनी की तरफ से कोयले की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इसके चलते प्रदेश में बिजली उत्पादन प्रभावित होने का खतरा मंडरा रहा है। सरकार को प्राइवेट जनरेटर को 1200 सौ करोड़ और कॉल इंडिया को 1000 करोड़ से ज्यादा का भुगतान करना है। इस कारण कोल इंडिया ने कोयले की आपूर्ति में कटौती की है।
फसलों पर पड़ सकता है असर…
बता दें कि बिजली प्रभावित होने के कारण किसानों पर भी इसका काफी असर पड़ सकता है। दरअसल उपभोक्ताओं और किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी के एवज में बिजली कंपनियों को सरकार से पैसे नहीं मिल पा रहे हैं। इस कारण प्राइवेट जनरेटर कोल इंडिया को भुगतान नहीं कर पा रही है। वहीं बिजली की परेशानी के कारण किसानों को भी इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। किसानों के लिए रबी का सीजन आने वाला है। अक्टूबर के महीने में किसानों को भी बिजली की मांग तेज हो जाएगी। प्रदेश में फिलहाल 1 हजार 62 मेगा वाट बिजली की डिमांड है। इस डिमांड की वर्तमान में आपूर्ती पूरी तरह से की जा रही है।

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