काशी कोतवाल काल भैरव बाबा का जाने रहस्य।।
विश्व का एक मात्र काशी धनवंतरी कूप का जाने महत्व।।
सन्तोष त्रिपाठी संत जी
साहित्यकार
काशी। श्रावण मास भगवान शिव का माह माना जाता है।जिसमें देश विदेश के भक्त काशी विश्वनाथ बाबा का दर्शन करने आते है। वैदिक मान्यता के अनुसार काशी भगवान शिव के त्रिशूल पर टिकी है।युग परिवर्तन के समय धरती जब जल मग्न होती है तो भी काशी ही बची रहती है। यहां दर्शन मात्र से कल्याण होता है।प्राचीन मान्यता के अनुसार यह शरीर का त्याग करने से आत्मा सीधे स्वर्गलोक में जाती है।यह आस पास के लोग अंतिम संस्कार करने आते है, यहां चिता की अग्नि कभी बुझती नहीं है ।
बाबा काल भैरव काशी के कोतवाल है, जो भक्त विश्वनाथ जी का दर्शन करते है वह काल भैरव का दर्शन जरूर करते है तभी दर्शन का फल प्राप्त होता है। कहा जाता है है एक सताब्दी में एक बार काल भैरव का कलरव निकलता है उस समय काशी में कष्ट आता है तो सभी पुजारी, विद्वान, भक्त बाबा काल भैरव की विशाल पूजा अर्चना हवन कीर्तन कर बाबा को प्रसन्न करते है तो विश्व में शांति आती है। कोरॉना काल में काल भैरव का कलरव छूटा तो कोरोना जैसी महामारी आयी। कठिन जप तप, हवन कीर्तन के बाद पुनः शांति स्थापित हुई।इसके पहले द्वितीय विश्व युद्ध के समय भी ऐसा ही हुआ था, यही काल भैरव मंदिर के पास दंड पानी महादेव मंदिर है जो भक्त वहा दर्शन करते है उसका सभी दंड माफ ही जाता है।
काशी में ही महा मृतुन्जय महादेव मंदिर है वहा मात्र बाबा कि दूध चढ़ाने मात्र से सवा लाख मृतुन्जय मंत्र के जाप का फल मिल जाता है उसका दूध का प्रसाद लेने मात्र से सभी रोगों से मुक्ति मिल जाती है।।
काशी मृतुन्जय मंदिर के अंदर धनवंतरी कूप का विश्व में बड़ा महत्व है, यह कूप कई हजार साल से हमेशा भरा रहता है, इसमें जल के आठ स्रोत है कच्छप भी कुआ में रहते है, यहां का जल पीने मात्र से पेट से संबंधित रोग पथरी ठीक हो जाती है।श्रावण मास में हजारों भक्त रोज दर्शन करते है यह शहर मंदिरों का शहर, घाटो का शहर, गलियों का शहर, लस्सी मलाई रबड़ी के लिए भी प्रसिद्ध है यही पर बाबा तुलसी दास जी को हनुमान जी के दर्शन हुए थे तुलसी दास ने यहा संकट मोचन हनुमान मंदिर व कई अन्य हनुमान मंदिरो की स्थापना की थी, यह विश्व में मानस मंदिर अनोखा मंदिर है यहां आठ भैरव के मंदिर भी है यहां भगवान बुद्ध का बोद्ध स्तूप बौद्ध मंदिर भी पूरे विश्व में प्रसिद्ध है।यहा विदेशी भी बड़ी संख्या में आते है, ब्रह्मा विष्णु सदाशिव भी बाबा विश्वनाथ का दर्शन करने आते है,यही है बाबा विश्वनाथ की अलौकिक छटा। हर हर महादेव।।












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