Uttar Pradesh State Bridge Corporation उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम में उड़ी नियमो की धज्जियाँ, 7 वर्षों से पुराने मामले अभी भी लंबित
प्रबंध निदेशक उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम लिमिटेड द्वारा अपने ही निगमादेशों तथा शासनादेशों का अतिक्रमण करते हुए विभागीय कार्रवाई के मामलो में नियमानुसार समयबद्ध निस्तारण नहीं किया जा रहा है निगम में कर्मचारियों /अधिकारियों की जांच लगभग 7 वर्षों से अधिक समय से लंबित रखकर उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है ज्ञातव्य हो कि इसमें से अधिकांश कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं । उनके सेवानिवृत्तिक देयकों को भी रोक लिया गया है जिससे वह भूखमरी के कगार पर आ गए हैं।
उत्तर प्रदेश शासन के कार्मिक अनुभाग 1 के शासनादेश संख्या 1/2015/13/9/98/का-1-2015 दिनांक 22/04/2015 को संलग्न कर प्रबंध निदेशक ने अपने पत्रांक 255 ESB/2889 SBC – परिवाद/2016 दिनांक 13/04/2016 द्वारा विभागीय कार्यवाही का प्राथमिकता / समय बद्ध निस्तारण हेतु आदेश दिया था जिसके अनुसार शासनादेश के बिंदु
(A) (11) द्वारा अभ्यावेदन प्राप्त होने के 15 दिन के अंदर नियुक्त अधिकारी / दण्डन अधिकारी द्वारा अंतिम आदेश जारी हो जाना चाहिए था ।
(B) बिंदु (22) के अनुसार दी गई नियमावली तथा स्पष्ट की गई समयबद्ध जांच ना होने की दशाओं में अपने शासकीय दायित्वों के प्रति उदासीनता मानते हुए अधिकारी को प्रतिकूल तथ्य के रूप में देखा जाएगा ।
(C) शासनादेश के बिंदु 19 में स्पष्ट है कि सेवानिवृत्त सरकारी सेवक को न तो कोई दंड दिया जा सकता है ना ही उक्त दंड के उद्देश्य से कार्रवाही जारी रखी जा सकती है ।
(D) बिंदु 23 के अनुसार स्पष्ट है कि यदि किन्ही कारणों से उपरोक्त शासनादेश के अनुसार प्रकरण का निस्तारण नहीं हो पाता है तो इससे अपचारी कर्मचारी किसी भी अनुतोष का हकदार नहीं होगा ।
उक्त शासनादेशों / निगमादेशों की धज्जियां उड़ाते हुए सेतु निगम प्रबंध तंत्र द्वारा सेवानिवृत्त कार्मिकों के देयकों को रोककर जांच प्रक्रिया पूरी न कर कर्मचारियों का उत्पीड़न किया जा रहा है ।
संबंधित विभागीय अधिकारियों तथा प्रशासनिक अधिकारियों से अनुरोध है कि इस तरह की अनिमितताओं पर त्वरित कार्यवाही करें और पीड़ित पक्ष को न्याय प्रदान किया जाय।












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