प्रातःकालीन मंत्र
प्रातः जागते से ही दोनों हथेलियों को मिलाकर निम्न मंत्र का जप करें।
कराग्रे वसति लक्ष्मीः, कर मध्ये सरस्वती।
करमूले तू गोविन्दः, प्रभाते कर दर्शनम्।।
मंत्र का अर्थ इस प्रकार है-
हथेलियों के अग्रभाग में भगवती लक्ष्मी, मध्य भाग में विद्यादात्री सरस्वती और मूल भाग में भगवान गोविन्द का निवास है। मैं अपनी हथेलियों में इनका दर्शन करता हूं।
पं देवेश कुमार शर्मा
सिंधी महाराज अलीगढ़











Leave a Reply