खाने की थाली में क्यों नहीं धोने चाहिए हाथ…
शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ।
हमारे धार्मिक शास्त्रों मे ऐसी बहुत सी बातें लिखी हैं, जिन्हें जानना हमारे लिए अति आवश्यका है। मगर आज कल की पीढ़ी की बात करें तो ये अपनी संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं। इसलिए आज अपने इस लेख में हम ऐसी ही एक बात बताने जा रहे है जिसके बारे में जानना शायद हर किसी के लिए बहुत आवश्यक है।हम सबमें में से बहुत से लोगों ने देखा होगा कि कुछ लोग भोजन करते समय एक ऐसी भूल कर बैठते हैं जिसका परिणाम बहुत बुरा होता है। जी हां अधिकतर अधिक लोगों में ये आदत पाई जाती है कि वे भोजन करने बाद खाने की थाली में ही हाथ धो लेते हैं।
तो बता दें शास्त्रों में ऐसा करना बिल्कुल गलत माना जाता है। इनमें किए उल्लेख के अनुसार कभी भी किसी व्यक्ति को भोजन की थाली में हाथ धोना नहीं चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के लिए ऐसा करना अशुभ माना जाता है। इसके अलावा ये भी माना जाता है कि थाली में हाथ धोने से उसमें बचे हुए अन्न का अनादर होता है। इतना ही नहीं भोजन की थाली में हाथ धोने से देवी लक्ष्मी और देवी अन्नपूर्णा भी नाराज़ होती हैं, जिससे घर में दरिद्रता आती है।
इसके अलावा शास्त्रों में अग्नि को मुख्य देवता माना गया है। साथ ही ये बताया जाता है कि यज्ञ में अर्पित की जाने वाली साम्रगी देवताओं को भोजन के रूप में प्राप्त होती है। इसलिए भोजन का विशेष महत्व माना गया है। तो वहीं कई अन्य पुराणों में अन्न का अपमान करना पाप माना गया है।
शास्त्रों में भोजन की थाली हमेशा पाटा,चौकी या पीढ़ा पर अर्थात अपने आसन से ऊंचे आसन पर सम्मानपूर्वक ही रखनी चाहिए। इसके अलावा भोजन देने वाले को भोजन की थाली को कभी एक हाथ से नहीं पकड़ना चाहिए। इससे जुड़ी मान्यताओं की मानें तो एक हाथ से पकड़ने से भोजन प्रेत योनि में चला जाता है। तो वहीं थाली में जूठन छोड़ना भी अशुभ माना जाता है। लाथ ही बताया जाता है कि इस बात का भी खास ध्यान रखना चाहिए कि भोजन से पहले भगवान का ध्यान एवं भगवान को भोग लगाकर भोजन करना चाहिए, ऐसा करना उत्तम होता है। अंत में बता दें भोजन करते समय क्रोध,हंसी, आपस में बात चीत नहीं करनी चाहिए तथा खड़े हो कर चलते हुए भोजन नहीं करना चाहिए।
आचार्य धीरज द्विवेदी “याज्ञिक”
(ज्योतिष,वास्तु,धर्मशास्त्र, एवं वैदिक अनुष्ठानों के विशेषज्ञ)
संपर्क सूत्र – 09956629515 / 08318757871











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