इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा वर्ष 2016 के एक शासनादेश को निरस्त करने के फैसले को सही करार दिया है कोर्ट ने पिछली सरकार के शासनादेश जारी करने को संदेहास्पद करार देते हुए तल्ख टिप्पणी भी की कहा कि चुनाव को देखते हुए यह महज कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए जारी किया गया लगता है यह आदेश जस्टिस राजेश सिंह चौहान की एकल पीठ ने सुभाष कुमार और 78 अन्य समेत सैकड़ों अध्यापकों व कर्मचारियों की ओर से दाखिल अलग-अलग याचिकाओं को खारिज करते हुए पारित किया I











Leave a Reply