देश में कब होगा वैश्या वृत्ति का खात्मा।
संत संपत्ति का विवाद कब होगा खत्म।।
कब होगा देश का चरित्र निर्माण।।
वाराणसी, ( सन्तोष त्रिपाठी संतजी) प्राचीन काल में राजा महाराजा के दरबार में सुरा सुंदरी का नृत्य हुआ करता था, कई ऎसे राजा थे जिनका चरित्र का पतन होने से राज्य भी चला गया।विश्व गुरु भारत देश आजाद हुएं सत्तर साल के बाद भी देश का चारित्रिक विकास नहीं हुआ।
कितने महात्मा संत कथाकार हुए सभी ने सिर्फ अपनी दुकान चलाई देश का सुधार नहीं हुआ।
ड्रा सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने अपने उद्बोधन में एक बार कहा था एक हजार कथाकार हो उसने मात्र एक संत, पैगम्बर ( भगवान का भेजा हुआ दूत ) उनके बराबर होता है।
ऐसा संत जो वाणी विलाश से , सौंदर्य विलास से दूर हो वहीं संत या पैगम्बर है।
कई दिनों से अखबार में संत,संपत्ति ओैर विवाद जैसे खबर पड़ कर मन दुखी हो गया है संत त्यागी न होकर विलास में फसा है।वहीं समाज में कई ऎसी राक्षसी विलासिता की खबर आरही है कि लगता है देश में संत पैगम्बर नहीं है प्रयागराज तीर्थराज माना जाता है।जहा शंकराचार्य को शास्त्रार्थ में हराने वाले मंडन मिश्र जैसे विद्वान हुए, जिस नगरी का नकल भू मंडल के सभी तीर्थ करते है आज वह नगर शर्म से शर्म नाक हो रहा है। प्रयाग में वैश्यावृति ,या संत संपत्ति का विवाद जैसी घटनाएं तीर्थराज के चरित्र में काले धब्बे के समान है ।
भारत ऎसा देश है जो जेल में रहकर भी गीता का उपदेश दिया साथ ही सबसे सुंदर रचना संत विनोबा भावे ने भागवत सार लिखकर देश की सही मार्गदर्शन दिया ।
आज आवश्यकता है गंगा , गायत्री,गीता,पेड़,पहाड़,नदी के साथ चरित्र विलास से बचने की जरूरत है। सभी संत फकीर समाज सुधारक को देश के चरित्र निर्माण के लिए आभियान चलाने की जरूरत है, जिससे भारत के तीर्थो का सम्मान बना रहे।फिर से देश विश्व गुरु बन सके।।












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