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उत्तराखंड : पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार की भूमिका से नाराज़ साधु संन्यासियों के दबाव में उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाया गया.

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उत्तराखंड. पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एक खास इंटरव्यू में उन क़यासों को खारिज किया, जिनमें कहा जा रहा था कि कुंभ मेले के आयोजन में उनकी सरकार की भूमिका से नाराज़ साधु संन्यासियों के दबाव में उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाया गया. इस बारे में संभवत: पहली बार खुलकर बातचीत करते हुए रावत ने साफ कहा कि साधु समाज की नाराज़गी की बातें तथ्यपूर्ण नहीं हैं.

रावत ने कहा कि उन्हें अखाड़ों के उनसे नाराज़ होने की बात वाजिब नहीं लगती. उन्होंने कहा, ‘कोविड 19 को लेकर स्थितियां जितनी गंभीर रहीं, अखाड़े भी उससे वाकिफ़ रहे और कुंभ मेले के आयोजन के लिए जो भी उचित स्वरूप हो सकता था, उस पर साधु समाज राज़ी था.’

मार्च के शुरू में ही उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पद पर त्रिवेंद्र सिंह रावत की जगह तीरथ सिंह रावत को लाया गया और फिर कुंभ का प्लान बदला. 1 अप्रैल से 30 अप्रैल तक पूरे एक महीने तक हरिद्वार में कुंभ का आयोजन हुआ, जिसमें करीब 91 लाख श्रद्धालु देश भर से इकट्ठे हुए.

कुंभ आयोजन को लेकर नए सीएम ने पहले कहा था ‘महाकुंभ सबके लिए है.’ फिर केंद्र की गाइडलाइनों के मुताबिक निगेटिव रिपोर्ट पर ही एंट्री की बात कही गई. गौरतलब है कि सीएम बनने के अगले ही दिन तीरथ रावत शाही स्नान के लिए हरिद्वार गए थे.

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