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Rahul Dwivedi Breaks Silence on Chairman Post, Crore-Rupee Deal & Red Beacon Car Allegations

Rahul Dwivedi Breaks Silence on Chairman Post, Crore-Rupee Deal & Red Beacon Car Allegations

राहुल द्विवेदी ने आरोपों को बताया निराधार, बोले—“बिना प्रमाण बदनाम करने की कोशिश”

नई दिल्ली। पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी संस्था के नाम पर कथित आर्थिक लेन-देन, चेयरमैन पद दिलाने और लालबत्ती वाली गाड़ी के इस्तेमाल को लेकर चल रहे विवाद के बीच राहुल द्विवेदी ने अपना पक्ष सामने रखा है। उन्होंने अपने खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि उन्हें बिना किसी ठोस प्रमाण के बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है।

हाल में सामने आई समाचार रिपोर्टों में चेयरमैन पद दिलाने के नाम पर कथित तौर पर करोड़ों रुपये लेने, सरकारी प्रभाव का दावा करने और लालबत्ती वाली गाड़ी के इस्तेमाल जैसे आरोपों का उल्लेख किया गया है। राहुल द्विवेदी ने इन आरोपों से साफ इनकार किया है।

“पद दिलाने के नाम पर किसी से पैसे नहीं लिए”

राहुल द्विवेदी का कहना है कि उन्होंने किसी भी व्यक्ति से चेयरमैन या किसी अन्य पद के नाम पर पैसे नहीं लिए। उन्होंने लालबत्ती वाली गाड़ी के इस्तेमाल के आरोप को भी गलत बताया।

उनका कहना है कि यदि उनके खिलाफ करोड़ों रुपये के लेन-देन या सरकारी पद दिलाने जैसे गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं, तो उनके समर्थन में भुगतान का रिकॉर्ड, बैंक दस्तावेज, नियुक्ति पत्र, सरकारी अनुमति अथवा वाहन से संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड भी सार्वजनिक किए जाने चाहिए।

शैलेश गर्ग से जुड़े मामले की निष्पक्ष जांच की मांग

उपलब्ध समाचार-पत्रों की कटिंग में शैलेश गर्ग के खिलाफ शिकायत, जांच और पुलिस कार्रवाई से संबंधित खबरों का भी उल्लेख है। रिपोर्टों में पद दिलाने, सरकारी कार्यालयों से जुड़े होने का दावा करने और लोगों से रकम लेने जैसे आरोपों का जिक्र किया गया है।

राहुल द्विवेदी के पक्ष के अनुसार, भरत शर्मा और शैलेश गर्ग के बीच कथित व्यावसायिक या संगठनात्मक संबंधों तथा संबंधित संगठन से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

हालांकि, इन आरोपों की सत्यता को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निकाला जा सकता है।

₹40 लाख के कथित ऋण और चेक बाउंस का मामला

राहुल द्विवेदी की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिस के अनुसार, भरत शर्मा ने कथित तौर पर उनसे ₹40 लाख उधार लिए थे। नोटिस में दावा किया गया है कि रकम की वापसी के लिए ₹20-₹20 लाख के दो चेक दिए गए थे, जिन्हें बैंक में प्रस्तुत किए जाने पर पर्याप्त धनराशि नहीं होने के कारण वापस कर दिया गया।

राहुल द्विवेदी का कहना है कि एक तरफ उन पर करोड़ों रुपये के लेन-देन के आरोप लगाए जा रहे हैं, जबकि दूसरी ओर उनके पास मौजूद कानूनी दस्तावेज कथित रूप से यह दर्शाते हैं कि उन्होंने स्वयं ₹40 लाख की राशि उधार दी थी।

“मेरे खिलाफ प्रत्यक्ष प्रमाण कहां हैं?”

राहुल द्विवेदी का कहना है कि किसी समाचार रिपोर्ट में किसी व्यक्ति का नाम सामने आ जाना अपने आप में आरोपों को प्रमाणित नहीं करता। उनका सवाल है कि उनके द्वारा किसी को पद दिलाने के बदले पैसे लेने, लालबत्ती वाली गाड़ी का इस्तेमाल करने या करोड़ों रुपये के कथित लेन-देन का प्रत्यक्ष प्रमाण आखिर कहां है?

उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने उनके नाम, पद या संस्था का गलत इस्तेमाल किया है, तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

निष्पक्ष जांच के लिए तैयार

राहुल द्विवेदी ने कहा कि वह किसी भी निष्पक्ष जांच में सहयोग करने और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर अपना पक्ष रखने के लिए तैयार हैं। उनका कहना है कि व्यक्तिगत विवाद को उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।

फिलहाल उपलब्ध समाचार कटिंग, कानूनी नोटिस में बताए गए तथ्यों और राहुल द्विवेदी द्वारा रखे गए पक्ष के आधार पर मामला विवादित है। लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है। मामले में वास्तविक स्थिति जांच, उपलब्ध दस्तावेजों और न्यायिक प्रक्रिया के अंतिम निष्कर्ष से ही स्पष्ट होगी।

जन मीडिया टीवी की अपील: गंभीर आरोपों से जुड़े मामलों में सभी पक्षों का पक्ष सामने आना और किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराने से पहले आधिकारिक जांच एवं न्यायिक निष्कर्ष की प्रतीक्षा करना जरूरी है।

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