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Twelve Madhav of Prayagraj आदि माधव के द्वादश मंदिर प्रयागराज के बारे में जानिए क्यों है खास

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Twelve Madhav of Prayagraj आदि माधव के द्वादश मंदिर प्रयागराज के बारे में जानिए क्यों है खास

आदि माधव के द्वादश मंदिर
श्रीकृष्ण को माधव भी कहा जाता है। मान्यता है कि प्रयागराज में संगम की रक्षा के लिए श्रीकृष्ण ने 12 रूप धारण किए थे उन रूपों की पूजा हेतु प्रयागराज में 12 स्थानों पर 12 मंदिर स्थापित किये गए थे,इनमे से कुछ मंदिर विलुप्त हो चूकें हैं
पौराणिक मान्यता है कि भगवान माधव ने प्रयाग में अवतरित होकर गंगा, यमुना और सरस्वती को बचाने के लिए राक्षस से युद्ध कर उसका वध किया था। बाद में राक्षसों से पवित्र संगम की रक्षा के लिए भगवान माधव 12 रूपों में प्रयाग में स्थायी रूप से विराजमान हुए थे। इन्हीं रूपों की पूजा अर्चना के लिए प्रयाग और उसके आसपास 12 मंदिर स्थापित किये गए,जिन्हें माधव मंदिर कहा जाता है।
1- इन मंदिरों में सबसे प्रमुख है श्री आदि वेणी माधव मंदिर। यह मंदिर प्रयाग के दारागंज मुहल्ले में स्थित है। वेदों में वेणी माधव मंदिर का वर्णन है।आदि वेणी माधव को नगर देवता कहा जाता है
5 मई 2020 को आदि बेनीमाधव मंदिर के महन्त ओमकार देव गिरि ब्रह्मलीन हो गए उनके शरीर को मंदिर के पीछे परिक्रमा मार्ग के बगल भू-समाधि दी गयी है
2- वेणी माधव मंदिर के बाद चक्र माधव मंदिर का स्थान है। यह मंदिर अरैल में सोमेश्वर महादेव वाली सड़क पर है। माना जाता है कि चक्र माधव जी अपने चक्र के द्वारा सबकी रक्षा करते हैं।
3- गदा माधव के रूप में विष्णु जी प्रयाग के छिवकी रेलवे स्टेशन के समीप विराजमान हैं। वैशाख मास में इनके पूजन का विधान है ,भाद्र शुक्ल की पंचमी को यहां मेला लगता है। मान्यता है कि वन गमन के समय भगवान राम ने यहां रात्रि विश्राम किया था।
4- प्रयाग के पास यमुनापार में अत्यंत प्राचीन सुजावन देव मंदिर है। यह मंदिर यमुना के बीच में है इसे पद्म माधव मंदिर माना जाता है। यहां माधव जी लक्ष्मी जी के साथ विराजमान हैं।
5- प्रयाग के पश्चिमी क्षेत्र में मामा-भांजा तालाब के पास अनंत माधव का मंदिर स्थित है। मुगलकाल के पूर्व यदुवंशी राजा रामचंद्रदेव के पुत्र राजा श्रीकृष्णदेव के समय इस क्षेत्र को उनकी राजधानी देवगिरवा के नाम से जाना जाता था। यवनों से बचाने के लिए इस मंदिर के पुजारी मुरलीधर शुक्ल ने अनंत माधव भगवान की मूर्ति को निज निवास दारागंज में स्थापित कर दिया था। यहां अनंत माधव मां लक्ष्मी जी के साथ विराजमान हैं। मुरली धर के वंशज श्री नीरज ने लक्ष्मी जी की मूर्ति को काली जी की मूर्ति बताया
6- बिंदु माधव मंदिर उस स्थानपर था जहां पर इन दिनों लेटे हुए हनुमान जी का प्राचीन मंदिर है। बिंदु माधव की पूजा-अर्चना देवताओं और महर्षि भारद्वाज द्वारा भी किये जाने का वर्णन मिलता है,यह वह स्थान है जहां सप्त ऋषिगण पूजन करते थे
7-शहर के उत्तरी भाग में जानसेनगंज क्षेत्र में स्थित दुर्येश्वर नाथ जी के मंदिर में मनोहर माधव लक्ष्मी के साथ विराजमान हैं।
8-नगर के उत्तर पूर्व में असि माधव मंदिर प्राचीन काल मे हुआ करता था,इस मंदिर की वर्तमान स्थिति ज्ञात नहीं है,
9-संकट हर माधव झूंसी के हंस तीर्थ के पीछे स्थित है। इस पीठ की पुनर्स्थापना प्रभुदत्त ब्रह्मचारी ने 1931 में की थी।इस स्थान पर प्राचीन वट वृक्ष आज भी है।
10-नैनी के अरैल क्षेत्र में यमुना तट पर है एक माधव मंदिर है ।
11- विष्णु माधव मंदिर का वर्णन प्राचीन ग्रंथो में मिलता है किंतु वर्तमान स्थिति ज्ञात नही ,मान्यता है कि प्रयागराज में गंगा,यमुना और सरस्वती जलधारा में विष्णु माधव जल रूप में विधमान हैं।
12-प्रयाग के झूंसी में सदाफल आश्रम में शंख माधव जी का मंदिर है। शंख माधव की पूजा करने से आठों सिद्धियां प्राप्त होती हैं।
टोडरमल के वंशज श्री अरुण अग्रवाल के अनुसार दशाश्वमेध घाट के निकट हरित माधव मंदिर है जो आदि माधव की तेरहवीं पीठ है,किन्ही कारण से मैं वहाँ तक नही पहुँच सका,विलुप्त माधव पीठों पर अध्ययन जारी है

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