कार्यकर्ता ? मेहनत-धनियां-हींग-(पूरण चन्दर पांडेय-अध्यक्ष जन अधिकार मंच )

कार्यकर्ता ? मेहनत-धनियां-हींग-(पूरण चन्दर पांडेय-अध्यक्ष जन अधिकार मंच )

राजनैतिक व्यंग्य

कार्यकर्ता एक बहुत ही खूबसूरत शब्द है व अगर आपके नाम के साथ यह शब्द जुड़ जाये तो बहुत ही सुखद अनुभूति व गर्व का अहसास आपको कराता है।
वस्तुतः ये भी एक माध्यम है किसी राजनीतिक पार्टी का कार्यकर्ता बनकर अपने क्षेत्र का विकास व देश सेवा करने का।जब चुनाव आते हैं तो यही अंतिम पंक्ति का मेहनती कार्यकर्ता घर घर जाकर,हाथ जोड़कर अपने नेता के लिए वोट मांगता है।
नेताजी द्वारा की गई गलतियों के लिए लोग इन्हें खूब खरी खोटी सुनाते हैं,बेइज्जत करते हैं फिर भी कार्यकता यही कहते हैं कि माताजी, अंकल जी हम पर विश्वास कीजिये,आप हमें जानते हैं,हम आपका कार्य कराएंगे विश्वास रखिये,हम जवाबदेह हैं गारंटी दे रहे हैं बस आप हमारे नेता को वोट दीजिये।
ओर ये सब माहौल बनने के बाद नेताजी मुस्कुराते हुए आते हैं और महफ़िल लूट ले जाते हैं। ओर उसके बाद ये मेहनती कार्यकर्ता?? उसके बाद ये मेहनती कार्यकर्ता यूँ समझ लो कि तेजपत्ते की तरह हो जाता है। तेजपत्ता, जिसे सब्जी बनाते समय जायका बढ़ाने हेतु सबसे पहले गरम तेल में डाला जाता है और भोजन बन जाने के बाद परोसते समय सबसे पहले उसी को निकाल बाहर किया जाता है क्योंकि उसकी उपयोगिता बस यहीं तक थी।फिर उस तेजपत्ता बने गरम तेल में तले गए मेहनती कार्यकर्ता से अगले चुनाव आने तक कोई नही पूछता की तू कैसा है या तुझे कोई परेशानी तो नही।इस बीच कुछ ऐसे कार्यकर्ता भी मौका देखकर जन्म ले लेते हैं जो हरे धनिये (चुनावी वर्ष में रेवड़ी पदाधिकारी) जैसे होते हैं।उन्हें कुछ पता ही नही होता कि क्या बन रहा है, दाल, पुलाव, सब्जी या कुछ ओर।
बस सब्जी बन जाने के बाद परोसते समय उन्हें ऊपर से डाला जाता है और फिर खुश करने हेतु सब्जी के सारे स्वाद (रेवड़ी पद) का श्रेय उसे ही दे दिया जाता है।इन्ही हरे धनिये जैसे कार्यकर्ताओं में से कुछ चतुर कार्यकर्ता (चापलूस) हींग जैसे बन जाते हैं जो केवल नाम के लिये चुटकी भर काम मे हाथ लगाते है लेकिन चखने वाले के हाथ में गहरी खुशबू (चाटुकारिता की) छोड़ जाते है। ओर अंत मे वही चापलूसी द्वारा संगठन में अच्छे नंबर (पद) पाते है। इसके अलावा खनन माफिया,शराब माफिया,ठेका माफिया,स्मेक माफिया,चरस गांजा माफिया,जिस्मफरोशी माफिया आदि भी हैं जो आपकी मेहनत से उगाये गए वृक्ष की कि छावं में अड्डा जमा लेते हैं और आप धूप में अपनी बारी के इन्तेजार में तपते खड़े रहते हैं। इस लेख के माध्यम से आप समझ ही गये होंगे कि विभिन्न पार्टियां आपकी प्रतिभा का उपयोग किस खूबसूरती से करत हैं।
अगर आपमे हींग जैसे (चापलूसी वाले) गुण हैं तो राजनीति के मैदान में उतरिये।
अन्यथा अगर यह लेख समझ मे आ जाये तो अपनी प्रतिभा व जन समर्पण के भाव का उपयोग अपने परिवार की उन्नति के साथ अपने क्षेत्र की सुख सुविधा जुटाने हेतु कीजिये। इससे आप कहीं ज्यादा यश व कीर्ति प्राप्त करेंगे।
अब आप स्वयं अपनी स्थिति का आंकलन कीजिये कि आप खुद को अपनी पार्टी में किस स्थान पर पाते हैं। अपने ज्ञानानुसार मेने अपना अनुभव लिख दिया है।
अपनी बेबाक राय आप कमेंट में लिखने हेतु स्वतंत्र हैं।

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