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सरस्वती शिशु मंदिर में कजरी महोत्सव सम्पन्न, कांवड़ यात्रा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां

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Kajri Mahotsav Celebrated with Devotion and Cultural Festivity at Saraswati Shishu Mandir, Prayagraj

प्रयागराज। सरस्वती शिशु मंदिर, किदवई नगर, प्रयागराज में श्रावण मास की पावन बेला पर कांवड़ यात्रा, कजरी कार्यक्रम एवं मेहंदी प्रतियोगिता का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन श्रद्धा और उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में राष्ट्र सेविका समिति से माया द्विवेदी जी, भाजपा मंत्री मंडल की मंत्री चेतना ओझा जी तथा राष्ट्र सेविका समिति से रीना जी का सान्निध्य प्राप्त हुआ।

कांवड़ यात्रा में गूंजा ‘हर-हर महादेव’

विद्यालय के भैया-बहनों ने उत्साह और श्रद्धाभाव के साथ कांवड़ यात्रा निकाली। यात्रा के दौरान बच्चे भगवान शिव के जयकारे लगाते हुए मंदिर पहुंचे, जहां पवित्र जल से शिवलिंग का जलाभिषेक किया गया। ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं, अनुशासन और सेवा-भाव से जोड़ने का प्रयास किया गया। बच्चों की सहभागिता ने कार्यक्रम को विशेष रूप से आकर्षक बना दिया।

कजरी गीतों और नृत्य ने मोहा मन

जलाभिषेक के बाद विद्यालय की बहनों ने पारंपरिक कजरी लोकगीतों और मनमोहक नृत्य की प्रस्तुति दी। कजरी की लोकधुनों ने प्रयागराज की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक परंपरा की सुंदर झलक प्रस्तुत की। बच्चों की प्रस्तुतियों को उपस्थित अतिथियों एवं आचार्य परिवार ने खूब सराहा।

मेहंदी प्रतियोगिता में दिखी रचनात्मक प्रतिभा

कार्यक्रम के दौरान मेहंदी प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। बालिकाओं ने विभिन्न आकर्षक डिजाइनों के माध्यम से अपनी कलात्मक एवं रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता ने आयोजन में सांस्कृतिक रंग के साथ रचनात्मकता का भी समावेश किया।

आरती और प्रसाद के साथ हुआ समापन

कार्यक्रम के अंत में विधिवत आरती एवं पूजन किया गया। इसके पश्चात सभी उपस्थित लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। विद्यालय की प्रधानाचार्या मीरा पाठक जी ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए सभी अतिथियों, आचार्य परिवार, विद्यार्थियों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम में समस्त आचार्य परिवार की उपस्थिति एवं सहभागिता सराहनीय रही। पूरे आयोजन ने यह संदेश दिया कि भारतीय संस्कृति केवल उत्सव तक सीमित नहीं, बल्कि भक्ति, संस्कार, लोकपरंपरा, अनुशासन और सामूहिक आनंद का जीवंत संगम है।

श्रावण की पावन बेला में आयोजित इस कजरी महोत्सव ने विद्यार्थियों के मन में भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और भारतीय परंपराओं के प्रति गौरव की भावना को और मजबूत किया।

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